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धान की जगह मक्का की बिजाई के लिए 1200 किसान आए आगे, 2900 एकड़ के लिए कराया पंजीकरण

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कुरुक्षेत्र। पानी के गिरते जलस्तर को देखते हुए सरकार द्वारा धान की बजाए मक्का की फसल को बढ़ावा देने की योजना के तहत अब तक थानेसर ब्लॉक के 1400 किसान आगे आए हैं, जिन्होंने 2900 एकड़ में मक्का लगाने के लिए पंजीकरण कराया है। इस योजनानुसार किसान 10 जून तक पंजीकरण करवा सकते हैं।
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उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया ने गांव मिर्जापुर में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जल ही जीवन विषय पर आयोजित किसान गोष्ठी में यह जानकारी देते हुए कहा कि जल ही जीवन है योजना को शुरू किया गया है, इस योजना के तहत पीने के पानी को बचाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों की चिंता को दूर करने के दायित्व को भी निभाने की तरफ कदम बढ़ाया गया है। पीने के पानी के संकट के कई दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए सरकार द्वारा एक पहल की गई है। उन्होंने बताया कि भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है और यह बरसात के कम और ज्यादा होने पर ही निर्भर रहना पड़ता है। सबसे ज्यादा पानी की खपत सिंचाई पर हो रही है और पानी की आवश्यकता सबसे ज्यादा पीने के लिए होती है। इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब फसल विविधिकरण के तहत कम पानी वाली खेती को अपनाने के लिए किसानों को जागरूक करने का एक दृढ़ संकल्प किया है।


यह ऐतिहासिक शुरूआत : धर्मवीर
जिला अध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर ने कहा कि जल संकट से निपटने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा ताकि भावी पीढ़ी को हम पीने का पानी उपलब्ध करवा पाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से मक्का की फसल को अपनाने के प्रति किसानों को जागरूक करने की यह एक ऐतिहासिक शुरुआत है, क्योंकि जल संकट एक बड़ी चुनौती है, मुख्यमंत्री की पहल से इस अनूठी योजना को बेशक छोटे स्तर पर किया जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में यह पहल ऐतिहासिक साबित होगी।
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यह दिया जा रहा किसानों को फायदा
इस योजना के तहत किसानों को मक्का का बीज नि:शुल्क दिया जाएगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की किस्त भी सरकार द्वारा भरी जाएगी, किसानों के खातों में 2 हजार रुपये की राशि भी जमा करवाई जाएगी, इसमें से 200 रुपये की राशि पंजीकरण के साथ और 1800 रुपये की राशि फसल अपनाने पर अगस्त माह तक खातों में जमा करवा दी जाएगी। इससे पानी, बिजली की बचत होने के साथ-साथ किसानों की आय में भी इजाफा होगा। इतना ही नहीं भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बरकरार रहेगी।
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