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हुडा और नगर परिषद के फेर में उलझकर अटका सेक्टर-

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हुडा और नगर परिषद के फेर में उलझकर अटका सेक्टर- आठ का विकास
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कुरुक्षेत्र।
तेजी से विकास करने के जोरदार ढिंढोरे पीटने के बावजूद असलियत शहर में मुंह खोले सामने खड़ी है। थोक में एकत्रित समस्याओं का जीता-जागता उदाहरण कुरुक्षेत्र शहर का सेक्टर-आठ है, जहां न सड़कें ठीक हैं और न पीने का पानी बेहतर। न गंदगी हट पाई और न लावारिस गो वंश को काबू करने की व्यवस्था। हालात कुछ ऐसे हैं कि विधायक से लेकर नगर परिषद प्रशासन, एमसी और अधिकारियों की फौज के बावजूद सेक्टर-8 सरकारी सिस्टम और अपनी बदहाली पर रोना रो रहा है। यही नहीं, डीसी, एडीसी, एसडीएम तथा हुडा ईओ भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे, जिसके चलते यहां के लोग प्रशासन की लापरवाह कार्यशैली से प्राथमिकी के आधार पर मिलने वाली जन सुविधाओं का टोटा झेलने को मजबूर हैं।
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आलम ये है कि समस्याओं को दूर करने को लेकर जब भी यहां के बाशिंदे हुडा ईओ के दरबार में जाते हैं तो वे सेक्टर-8 को अपने अधीन होने की बात से इनकार करते हुए नगर परिषद में जाने की सलाह देते हैं। कहा जाता है कि यह सेक्टर तो कमेटी के पास जा चुका है। वहीं लोग जब नगर परिषद ईओ दरबार तक पहुंचते हैं तो उन्हें यहां भी निराशा हाथ लगती है। नप अधिकारी समस्याओं पर कन्नी काटते हुए सेक्टर-8 को हुडा के अंतर्गत ही होने की बात कहकर वापिस लौटा देते हैं। गौरतलब है कि सेक्टर-8 को पिछले वर्ष नगर परिषद के अधीन कर दिया गया था, लेकिन कभी बजट तो कभी अन्य कारणों के चलते यह सेक्टर अनाथ-सा बनकर रह गया है। क्योंकि नप कमेटी भी लोगों के समक्ष इसे अपने अंतर्गत होने से पल्ला झाड़ चुकी है। निचोड़ निकाला जाए तो सेक्टरों को नप के अधीन देने का सरकार का फैसला यहां के लगभग 1500 वोटरों एवं करीब तीन हजार की आबादी के लिए अभी तक अभिशाप साबित हुआ है। सेक्टर के बाशिंदे सरकारी सिस्टम और अफसरों की गैर जिम्मेदाराना कार्य-प्रणाली को जोर-जोर से कोस रहे हैं। सेक्टर-8 वार्ड-11 के एमसी प्रदीप सैनी से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
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