अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत पालि प्राकृत विभाग में संस्कृत अकादमी पंचकुला के सहयोग से चल रहे संस्कृत सप्ताह के छठे दिन शतावधान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पांचालपीठों में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित पीरिजीवी रंगचार्युलु हैदराबाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा संस्कृत अकादमी के अध्यक्ष डॉ सोमेश्वर दत्त ने की तथा मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य नरेंद्र पिपलानी एवं सारस्वत अतिथि विनोद पचौली रहे।
मुख्य वक्ता नरेंद्र पिपलानी ने कहा कि संस्कृत मानवमात्र की मूल, नैसर्गिक भाषा है। समस्त विश्व की भाषाओं के मूल शब्द संस्कृत से निष्पन्न होते हैं परंतु हम उन्हें पहचानते नहीं हैं। उन्होंने विदेशी भाषाओं के अनेक दृष्टांत प्रस्तुत किए जिनका मूल संस्कृत में है। उन्होंने विश्व के सभी धर्मों को भी वेद पर आधारित बताया। शतावधान कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अखिल संस्कृत वांग्मय विषय से प्रश्न पूछे जिनका उत्तर आचार्य रंगाचार्युलु ने संस्कृत वांग्मय के श्लोकों में प्रस्तुत किया। शतावधान का प्रथम प्रदर्शन आंध्रप्रदेश के विजयनगर में किया गया था। शतावधान के अंतर्गत 10 छात्रों द्वारा कुल 100 प्रश्न पूछे गए। शतावधान का संयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी गवीश ने किया। संस्कृत अकादमी के अध्यक्ष डॉ सोमेश्वर दत्त ने संस्कृत अकादमी की उपलब्धियों एवं संस्कृत भाषा के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। मंच का संचालन डॉ शिवानी ने किया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ ललित कुमार गौड, डॉ आरपी मिश्र, डॉ कृष्णा रंगा, डॉ सुरेंद्र मोहन मिश्र, डॉ विभा अग्रवाल, डॉ स्वर्ण प्रभा, डॉ महेंद्र हंस, डॉ एएन मिश्र, रमेश सुखीजा एवं विभाग से सभी छात्र उपस्थित थे।