कुरुक्षेत्र। इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से व्यापारियों को चोर कहने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि व्यापारी दिन-रात मेहनत करके जहां अपने परिवार का पेट पालते हैं, वहीं सरकार के खजाने में राजस्व जमा करवाते है। कुछ व्यापारी टैक्स चोरी करते होंगे, लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से सभी व्यापारियों को टैक्स चोर कहना सरासर गलत है। अशोक अरोड़ा जिला इनेलो कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। अरोड़ा ने कहा कि आज तक कपड़े पर कोई टैक्स नहीं था, लेकिन अब सरकार कपड़े को जीएसटी के दायरे में ला रही है। इसके विरोध में जब कपड़ा व्यापारी मुख्यमंत्री से मिलने गए तो मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कपड़ा व्यापारी नंबर दो का काम करते हैं और स्वीकार किया कि वे स्वयं भी कपड़े का काम करते समय नंबर दो का काम करते थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह पता होना चाहिए कि आजाद भारत के इतिहास में आज तक कपड़े पर कोई टैक्स नहीं था। पहली बार कपड़े को जीएसटी के दायरे में लाया जा रहा है। इसीलिए मुख्यमंत्री का यह कहना कि सभी कपड़ा व्यापारी नंबर दो का काम करते हैं, पूरे व्यापारी वर्ग का अपमान है। उन्होंने कहा कि व्यापारी देश और प्रदेश की रीढ़ की हड्डी होते हैं। उपभोक्ताओं से टैक्स इक्कठा करके सरकार के खजाने में जमा कराते हैं, जिससे सरकार का कामकाज चलता है। इसके अलावा व्यापारी सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। जनता के हित के लिए धर्मशालाएं बनवाने, पीने के पानी के प्याऊ इत्यादि लगवाने का काम भी व्यापारी बढ़चढ़ कर करते हैं। देश पर संकट के समय व्यापारी हर प्रकार की आर्थिक सहायता देने से कभी पीछे नहीं हटते। राष्ट्र निर्माण में व्यापारियों की अहम भूमिका है। मुख्यमंत्री को प्रदेश के व्यापारियों का अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है। अरोड़ा ने मांग की कि कपड़े को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए तथा साथ ही मुख्यमंत्री को अपने इस बयान के लिए कपड़ा व्यापारियों से माफी मांगनी चाहिए।
2 लाख लोगों का रोजगार छीनने जा रही है सरकार
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में डीजल के ऑटो रिक्शा बंद करके सरकार लगभग दो लाख लोगों का रोजगार छीनने जा रही है। जिससे इन परिवारों के सामने रोजी-रोटी के लाले पड़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले अढ़ाई साल के शासनकाल में मनोहर लाल की सरकार ने केवल मात्र रोजगार छीनने का काम किया है। किसी को रोजगार नहीं दिया। अरोड़ा ने मांग की कि इन दो लाख लोगों का रोजगार छीनने से पहले सरकार को इनके लिए रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।