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तेल कंपनियों के अधिकारियों पर अटकी पट्रोल पंपों की जांच

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ठंडा पड़ रहा जांच अभियान, महज 19 पेट्रोल पंपों की हो पाई जांच
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। तेल कंपनियों के अधिकारियों की कमी के चलते जिला भर में पेट्रोल पंपों की जांच का अभियान ठंडा पड़ता दिखाई देने लगा है। जिससे पंप संचालकों पर इस जांच का असर नहीं हो रहा है और यही कारण है कि आए दिन उपभोक्ताओं को मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। उत्तरप्रदेश में पिछले करीब तीन माह पहले अनेकों पेट्रोल पंपों पर मशीनों में ही चिप लगा उपभोक्ताओं को चूना लगाने का बड़े स्तर पर खुलासा हुआ था। उसी दौरान प्रदेश सरकार ने भी पूरे प्रदेश भर में पेट्रोल पंपों की जांच करवाए जाने का निर्णय लिया था, जिसके चलते ही एक अभियान भी चलाया गया। इसके लिए जिला में थानेसर, शाहाबाद व पिहोवा एसडीएम के नेतृत्व में टीमें भी गठित की गई, जिसमें एक अधिकारी खाद्य एवं पूर्ति विभाग से, एक अधिकारी नापतोल विभाग से व एक कर्मी जिला प्रशासन की ओर से शामिल किए जाने के साथ-साथ एक अधिकारी तेल कंपनियों की ओर से शामिल किया गया। हालांकि पिछले माह ही शुरू किए गए इस अभियान से पेट्रोल पंप संचालकों में हड़कंप मच गया था, लेकिन अब फिर से यह अभियान ठंडा पडने लगा है और अब तक महज 19 पंपों की ही जांच की जा सकी है। वहीं पंप संचालक भी इसे औपचारिकता करार देने लगे है। अभियान तेज न हो पाने के पीछे तेल कंपनियों के अधिकारियों की कमी रहना माना जा रहा है। खाद्य एवं पूर्ति विभाग की मानें तो तेल कंपनियों के पास अधिकारियों की कमी है या फिर उनके पास बड़ा एरिया होता है, जिसके चलते वे इतना समय नहीं दे पाते, जिससे लगातार जांच अभियान चलाया जा सके। ऐसे में जब इन तेल कंपनियों के अधिकारियों के पास समय होता है तो जांच कार्य कर लिया जाता है।
धर्मनगरी में 20 तो जिला भर में 95 पेट्रोल पंप
जिला भर में पेट्रोल पंपों की संख्या दिनोदिन बढ़ती जा रही है। अब धर्मनगरी में ही जहां 20 पेट्रोल पंप स्थित है वहीं जिला भर में 95 पट्रोल पंप है, जिनमें से मई माह में 14 तो जून माह में 5 पेट्रोल पंपों की जांच की जांच की गई।
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नहीं मिली कोई खामी : वीरेंद्र सिंह
जिला खाद्य एवं पूर्ति अधिकारी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि पिछले दो माह के दौरान 19 पेट्रोल पंपों की जांच की गई। यह जांच अभियान प्रदेश सरकार के निर्देशों के चलते विशेष रूप से मशीनों में चिप लगे होने को लेकर की गई। अब तक के चलाए गए अभियान के दौरान कोई भी खामी किसी पेट्रोल पंप में नहीं पाई गई है। वहीं तेल कंपनियों के अधिकारियों के अभाव के चलते यह जांच अभियान तेज नहीं हो पा रहा है, फिर भी भरसक प्रयास किए जा रहे है। कोई गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित पेट्रोल पंप के खिलाफ अवश्य ही आवश्यक कार्रवाई तत्काल की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 4 माह से कम व मिलावटी पेट्रोल व डीजल दिए जाने की उनके पास कोई भी लिखित शिकायत नहीं पहुंची है। उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
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न शौचालय तो न हवा का इंतजाम
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जिला भर में स्थित अधिकतर पेट्रोल पंपों पर आधारभूत सुविधा शौचालय व वाहनों में हवा भरने की व्यव्यस्था तक भी नहीं है जबकि पंप संचालन में सबसे पहले ये शर्ते रखी जाती है। अधिकारी भी इन सुविधाओं को गंभीरता से नहीं ले रहे है। यहां तक कि जांच के दौरान कभी इन सुविधाओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता।
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150 रूपये के पेट्रोल में बाइक चली महज 7 किलोमीटर : यमन
7 बी कॉलोनी निवासी यमन शर्मा का कहना है कि उन्होंने शहर के एक पेट्रोल पंप से पिछले सप्ताह ही 150 रुपये का पेट्रोल अपनी बाइक में डलवाया, लेकिन इसके बाद बाइक महज 7 किलोमीटर तक ही चल पाई। पेट्रोल डालते समय मीटर व राशि भी सही दशाई गई। उनका आरोप है कि कम पेट्रोल देकर उनकी तरह अनेकों दूसरे उपभोक्ताओं को भी चूना लगाया जा रहा है। यह शहर में मुख्य रोड पर ही स्थित पेट्रोल पंप का मामला है जबकि दूर दराज गांवों में स्थित पट्रोप पंपों पर तो ओर भी अधिक गोलमाल की संभावना बनी रहती है। जहां पर अधिकारी कई वर्षों तक भी जांच के लिए नहीं पहुंचते।
मीटर घूमता है, पेट्रोल डलता नहीं : परांजल
-- गांव डीग निवासी परांजल का कहना है कि उसने शाहाबाद के पास पेट्रोल पंप से 200 रूपये का पेट्रोल डलवाया, लेकिन महज 15 किलोमीटर तक ही चल पाई। ऐसा ही उनके साथ पिछले दो माह में कई बार हो चुका है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बड़े स्तर पर चूना लगाया जा रहा है तो वहीं वाहन निर्माता कंपनियों पर वाहनों की एवरेज कम होने के बेवजह सवाल उठाए जा रहे है। उन्होंने आशंका जाहिर कि पेट्रोल पंपों पर मशीनों में उत्तरप्रदेश की तर्ज पर चिप लगाई हुई है, लेकिन अधिकारी मौन धारण किए हुए है।
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नहीं होती कोई गड़बड़ी : गुप्ता
कुरुक्षेत्रा पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के प्रधान सुरेश गुप्ता का कहना है कि जिला भर में पेट्रोल पंपों पर कोई गड़बड़ी नहीं की जाती। कोई डीलर ऐसा करता भी है तो उसका पंप फेल हो जाता है और इसी कंपीटीशन के चलते ही सभी डीलर बिना मिलावट व पूरी मात्रा में पेट्रोल व डीजल उपभोक्ताओं को देते है। जो भी आरोप लगाए जा रहे है वे बेबुनियाद है।
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