निजी स्कूलों में नियम 134-ए के तहत अपने बच्चों को दाखिला दिलवाने के लिए अभिभावकों को एक बार फिर पसीना बहाना पड़ रहा है। ये अभिभावक अपने बच्चों सहित अधिकारियों व निजी स्कूलों के बीच फंसकर रह गए है। अधिकारी उन्हें दाखिले के लिए इन स्कूलों मेें भेज रहे है जो स्कूल प्रशासन सीधे तौर पर दाखिले से इंकार कर रहा है।
ऐसे हालात में अभिभावक बच्चों को लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे है। शिक्षा विभाग द्वारा 3 जुलाई को ली गई परीक्षा का 8 जुलाई को परिणाम जारी किया। सोमवार को विभाग ने सभी संबंधित निजी स्कूलों में परीक्षा में क्वालीफाई हुए बच्चों की सूची भेज दी, जिसके साथ ही उन्हें दाखिला दिए जाने के निर्देश भी दिए।
जिसके बावजूद भी अभिभावक बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचने पर बिना दाखिले के ही बैरंग लौट रहे है। पहले दिन से ही शुरू हुआ यह सिलसिला बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। विनोद कुमार, मुकेश कुमार, सतबीर, विजय कुमार, अजय सहित दर्जनों अभिभावक जिला उपायुक्त पास पहुंचे। जहां उपायुक्त के न मिलने पर उन्होंने उप जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत पत्र सौंपा।
उन्होंने इस दौरान गहरा रोष जताते हुए आरोप लगाए कि विभाग द्वारा अलाट किए गए डीएवी स्कूल में वह अपने बच्चों के दाखिले के लिए पहुंचे तो उन्हें स्पष्ट इंकार कर दिया। जिसके चलते ही वह अधिकारियों को गुहार लगाने के लिए मजबूर हुए है। अभिभावकों ने निर्णय लिया कि वह वीरवार को जिला सचिवालय में रोष जताएंगे तथा जिला उपायुक्त से फिर गुहार लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों को दाखिला नहीं दिया गया तो वह सड़कों पर कड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
दाखिला दिया तो अब बता दिया 5 हजार का खर्च
134- ए के तहत निजी स्कूलों द्वारा पहले दिए गए दाखिले के बावजूद भी अभिभावकों को प्रताड़ित होना पड़ रहा है। उन पर तरह-तरह के दबाव बनाए जा रहे है। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को जिला शिक्षा कार्यालय में भी पहुंचा। जहां एक अभिभावक ने बताया कि वह बेहद गरीब है और दाखिले के बाद अब संबंधित निजी स्कूल प्रशासन ने उसे 5 हजार रुपये विभिन्न प्रकार के खर्च के तौर पर जमा करवाने के लिए कहा है। ऐसे हालात में वह अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में भी समय पर दाखिला दिलवाने से वंचित रह गया। इस मामले की पुष्टि उप जिला शिक्षा अधिकारी ने भी की।
पहले ही 65 बच्चों को दिया दाखिला : जसूजा
डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल गीतिका जसूजा का कहना है कि उन्होंने पहले ही इस नियम के तहत 65 बच्चों को दाखिला दिया हुआ है और अब उनके पास रिक्त सीटें नहीं है। विभाग के अधिकारी कैसे उनके स्कूल में रिक्त सीटें दिखा रहे है, यह वे समझ नहीं पा रही है। उन्होंने इस बारे में विभाग को पत्र भी लिख दिया है। प्रशासन को इन बच्चों के लिए समाधान निकालना चाहिए, ताकि उनकी पढ़ाई भी हो सके और अभिभावकों को परेशान न होना पड़े।
दाखिला तो हर हाल में देना ही होगा : नमिता कौशिक
उप जिला शिक्षा अधिकारी ने इस दौरान बातचीत करते हुए बताया कि उन्होंने अभिभावकों की शिकायत ले ली है। पहले दिन से ही ये शिकायतें मिलनी शुरु हो गई, जिससे निजी स्कूलों की मनमानी स्पष्ट उजागर हो रही है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों को इन बच्चों को दाखिला तो देना ही होगा। विभाग इस संबंध में उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवा रहा है।