अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र । वाईएमसीए फरीदाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश अग्रवाल ने कहा है कि भारत में महिलाओं की स्थिति हमेशा ही सम्मानीय रही है। पिछले कुछ दशकों में लिंग संवेदनशीलता को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है जिसका फायदा आने वाले समय में समाज को होगा। लिंग संवेदलशीलता समय की आवश्यकता है। जब तक हम देश की आधी आबादी के महत्व को नहीं समझेंगे व बराबरी का व्यवहार व अधिकार नहीं देंगे तब तक कोई समाज 21वीं सदी में प्रगति नहीं कर सकता। वे शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूजीसी मानव संसाधन विकास केंद्र में चल रहे शॉर्ट टर्म कोर्स के समापन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सदियों से दुनियाभर में महिलाओं ने कई चुनौतियों का सामना किया है ,लेकिन इसके बाद भी महिलाओं में हर क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महिला राष्ट्र अध्यक्ष दुनिया को एक नई दिशा दे रही हैं। भारत में भी महिलाओं ने सभी क्षेत्रों में खुद को साबित किया है। अब यह जरूरत है कि हम पारिवारिक स्तर पर बच्चों में एक दूसरे के प्रति संवेदनशीलता पैदा करें ताकि आने वाले समय में महिला व पुरूष के नाम पर किसी तरह का भेदभाव न हो। उन्होंने कहा कि इस तरह के कोर्स समय की जरूरत हैं व सभी विश्वविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर जरूरी है ,ताकि शिक्षक इन पाठ्यक्रमों से जो सीखकर जाते हैं उसे क्लासरूम में जाकर विद्यार्थियों के साथ सांझा कर सकें। समापन अवसर पर डीएसपी तान्या ने अपने अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों को लेकर सचेत रहने की आवश्यकता है। महिला व पुरुष को लेकर समाज में भेदभाव किसी न किसी स्तर पर है लेकिन जरूरत इस बात की है कि हम आने वाली पीढ़ियों को ऐसे शिक्षित करें कि उनमें लिंग को लेकर न केवल संवेदनशीलता हो बल्कि एक दूसरे को बराबरी का दर्जा दें। मानव संसाधन विकास केन्द्र की निदेशिका डॉ. नीरा वर्मा ने इस कोर्स की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस शार्ट टर्म कोर्स में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विशेषज्ञों ने लिंग संवेदनशीलता को एक नए दृष्टिकोण के साथ प्रतिभागियों के सामने रखा है। इसका निश्चित रूप से विद्यार्थियों को लाभ होगा। इस मौके पर प्रो. मंजूषा शर्मा व सभी प्रतिभागी मौजूद थे।