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पुरातन शैली में आस्था और इतिहास के प्रसंगों से रंगी धर्मनगरी

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पुरातन शैली, आस्था और इतिहास से रंगी धर्मनगरी
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
आप महाभारत के रण धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में हैं। इसका अहसास आपकों यहां की दीवारें कराएंगी। इन दीवारों पर एक बार नजर पड़ते ही आपकी निगाह थम जाएगी। क्योंकि अब यह रेत, सीमेंट और ईटों से बनी साधारण दीवारे नहीं, बल्कि अद्भुत चित्रकारी के जरिए गीता और महाभारत के प्रसंगों को दर्शाती स्क्रीन बन चुकी हैं। इनसे आपको को कई प्रसंग-कहानी और महाभारत से जुड़े किस्सों को जानने का मौका मिलेगा। धर्मनगरी के दीवारों पर यह चित्र पुरातन शैली में दिखेंगे।
इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती के दौरान इस कार्य के लिए देश के 300 से अधिक कलाकार धर्मनगरी की दीवारों का उपयोग कैनवास की तरह कर रहे हैं। दीवारों पर आकार ले रहे इन विशाल चित्रों में गीता संदेश से लेकर महाभारत युद्ध तक के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों को पेश किया जाएगा। महाभारतकाल की कहानी बयां करती यह दीवारें सही मायने में अब 5000 साल पुराने इतिहास के पन्नों के रुप में तब्दील होने वाली है। संभवत: यह भी पहला प्रयास है, जब इतने बड़े पैमाने पर धर्मनगरी की दीवारों को आस्था। इतिहास के रंग में रंगा जा रहा है। इन दृश्यों को खास बनाने के लिए नेशनल और स्टेट अवार्डी उन कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने भारत के अलावा दूसरे देशों में अपनी कला जादू बिखेर चुके हैं। कुरुक्षेत्र में चल रहे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 के दौरान यह चित्रकारी जीटीरोड पिपली से लेकर धर्मनगरी की दीवारों पर अनेक जगहों पर दिखाई देगी। बता दें कि जिन शैलियों में यह पेटिंग तैयार की जा रही हैं, उनका भी अपना सैकड़ों साल पुराना इतिहास है। इनमें स्वराष्ट्र की लोक शैली, तेलंगाना की चेरियल नक्काशी, बिहार की मधुबनी और बनारसी शैली जैसी अनेक अद्भुत और अनूठी शैलियों में बने चित्र इन दीवारों को खास बनाएंगे।
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पूर्वजों से मिली 800 साल पुरानी कला
गुजरात से आईं पूर्वी सोलंकी ने बताया कि वे स्वराष्ट्र लोक शैली की चित्रावली बनाएंगी। इसमें महाभारत में हुए छलकपट को पेश किया जाएगा। हैदराबाद तेलंगाना से पहुंचा दल चेरियल पेंटिंग करेंगा। इस दल की सदस्य दीपिका और पवन ने बताया कि यह उनका पुश्तैनी कार्य है। लगभग 400 वर्षों से उनके पूर्वज इस कला को कर रहे हैं। चेरियल पेंटिंग ने महाभारत और रामायण काल की गाथा दर्शाई जाती है। इसके साथ ही इस कलाकृति का चित्रण 30 मीटर कपड़े पर करके पूरी महाभारत की गाथा को दर्शाया जाता है। बनारस यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट के स्नातकोत्तर महेंद्र भगत बनारसी शैली में गीता सार का चित्रण करेंगे। महाराष्ट्र जलगांव के कलाकार रंगोली और बिहार से आए कलाकार मधुबनी पेंटिंग करेंगे।

दिवारों पर 15 वीं शताब्दी का चेरियल आर्ट भी दिखेगा धर्मक्षेत्र में
पर्यटकों को प्राकृतिक रंगों से तैयार चेरियल पेंटिंग की झलक भी इन दिवारों पर दिखेगी। तेलंगाना की चेरियल आर्ट पेंटिंग में महारथ रखने वाले कलाकार नेशनल अवार्डी हैदराबाद वासी डी वैंकुटम रमना और स्टेट अवार्डी पवन कुमार ने बताया कि इस कला की शुरुआत 15 वीं शताब्दी में हुई थी।
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स्विटजरलैंड और चीन में दिखा चुके हैं चेरियल आर्ट पेंटिंग का जलवा
हैदराबाद से आई कलाकार कलाकार सौम्या धनाकोटा, दीपिका और अर्चना ने बताया कि यह पेटिंग खादी के कपड़े पर की जाती है। मास्क नारियल छाल से तैयार किया जाता है। इन दोनों को तैयार करने की विधि एक समान है। पहले कपड़े पर ब्रश से चित्र का बाहरी आकार उकेरा जाता है। उसके बाद बैकग्राउंड में भगवान या उसकी कलाकृति के अनुसार रंग भरे जाते हैं। चेरियल पेंटिंग को तैयार करने के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जोकि पेड़ों की छाल, फूलों आदि से बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि नकाश ने अभी हाल ही में चीन और स्विटजरलैंड में अपनी कला का जलवा दिखा चुके हैं।
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