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जनहित में है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
निजता हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार के निर्णय की सराहना
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। निजता हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और इसमें सरकार हस्तक्षेप कर इसे सार्वजनिक रूप से अपनी इच्छा के अनुरूप इस्तेमाल नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने निजता को अब मौलिक अधिकार मानते हुए वीरवार को अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले को आम लोगों के साथ-साथ वकीलों ने भी सराहा है। जिला बार एसोसिएशन के प्रधान मनोज वशिष्ठ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय बेहद अहम है। सरकार को इसे अमल में लाना होगा और अब आधार के तौर पर एकत्र की गई जानकारी का कहीं भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय आम जनहित में सुनाया है।
प्राइवेसी को बनाए रखना संविधान में है : जगरूप
एडवोकेट जगरूप ढुल का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की प्राइवेसी बनाए रखना हमारे संविधान में भी है और इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाया है। इससे आम आदमी की निजता और अधिक मजबूत होगी। किसी भी नागरिक के इस अधिकार का हनन नहीं होना चाहिए और सरकार द्वारा आधार के बहाने जुटाई जा रही जानकारी कहीं भी कभी भी सार्वजनिक हो सकती है।
न्याय प्रणाली में बढ़ेगा विश्वास : जयनारायण
एडवोकेट जयनारायण शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले से आम आदमी का न्याय प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा। यह हर नागरिक के हित में आया फैसला है और अब सरकार निजी जानकारी आधार के बहाने नहीं जुटा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट का फै सला मान्य होगा : धुम्मन
एडवोकेट धुम्मन सिंह किरमिच का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निजता को लेकर सुनाया गया फैसला सभी को मान्य होगा। सरकार न्याय प्रणाली के हर फैसले की पालना करती है तो वहीं कोर्ट ने आम जन के हित को देखते हुए ही यह फैसला सुनाया है।
जनहित में आया अहम निर्णय : अग्रवाल
एडवोकेट अनिल अग्रवाल का कहना है कि निजता का अधिकार अब मौलिक अधिकार है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय सुनाया है। निजी जानकारी को अब कहीं भी सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा और इस निर्णय के बाद लोगों में अपनी निजता को लेकर विश्वास बढ़ेगा। आम आदमी के जीवन में दखल नहीं होना चाहिए।
सरकार को सुप्रीम कोर्ट का झटका : विर्क
एडवोकेट हरमनदीप सिंह विर्क ने कहा कि सरकार को किसी की निजी जिंदगी में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति की अपनी जिंदगी है। इसमें किसी का भी दखल नहीं होना चाहिए। यदि सरकार इसमें दखल देती है तो ये आम व्यक्ति के अधिकारों का हनन होगा। इससे व्यक्ति के जीवन में कोई सीक्रेसी नहीं रह जाएगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार को झटका दिया है।
विशेष मामले में करें सरकार इसे इस्तेमाल : अमन चीमा
एडवोकेट अमन चीमा का कहना है कि सरकार को किसी व्यक्ति की जिंदगी से खेलने का कोई अधिकार नहीं है। हर व्यक्ति को अपने ढंग से जिंदगी जीने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि सरकार को यदि किसी मामले में इसका इस्तेमाल करे तो समझ में आता है, लेकिन आम इंसान की जिंदगी में सरकार को ऐसे दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। सरकार आधार कार्ड से जोड़कर प्रत्येक व्यक्ति के डाटा को इकट्ठा करना चाहती है। ऐसे में इसका दुरुपयोग भी हो सकता है। हैकर इस डेटा को चुराकर इसे सार्वजनिक कर सकते हैं।