दीपक शर्मा
कुरुक्षेत्र। अटक-अटक कर चलते काम के उदाहरण तो आपके सामने पहले भी आते रहे होंगे, लेकिन कुरुक्षेत्र में एक ऐसा भी प्रोजेक्ट है जोकि लटक-लटक कर भी पूरा नहीं हो पा रहा। बात हो रही है पिपली से लाडवा रोड पर चलते सड़क चौड़ीकरण कार्य की। यहां पिछले 11 माह से सड़क को चौड़ा करने का काम जारी है, लेकिन इतने लंबे अंतराल में भी पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के अधिकारी 6 किलोमीटर का रास्ता भी कंपलीट नहीं करा पाए। हालांकि कहने को यह स्टेट हाईवे जरूर है, लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था यहां नजर नहीं आती।
गौरतलब है कि इस साल के फरवरी महीने में गांव मथाना से लगते हाइवे किनारे सड़क को चौड़ा करने के लिए खुदाई शुरू की गई थी। इसके बाद गांव सिरसमा, बीड़ मथाना, किशनपुरा कट, पिपली मंडी के सामने तथा कड़ामी मोड़ के आसपास भी चौड़ीकरण कार्य शुरू हुआ, लेकिन पिछले सर्दी के मौसम में शुरू हुए छह किलोमीटर के चौड़ीकरण कार्य को इस सर्दी के सीजन में भी पूरा कर पाना विभाग के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। फोरलेनिंग कार्य पूरा न कर पाने पर विभाग की लापरवाही पर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिरकार इतने लंबे समय में भी सड़क चौड़ी क्यों नहीं हो पा रही। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पिपली और लाडवा थाने के अंतर्गत जनवरी से अगस्त तक सड़क दुर्घटनाओं के 114 मामले दर्ज होने के बाद अबतक करीब 145 मामले दर्ज हो चुके हैं, जिसमें 67 राहगीरों को पीडब्ल्यूडी के लटके प्रोजेक्ट एवं अन्य कारणों से जान गंवानी पड़ी। वहीं कई मामले ऐसे भी हैं, जोकि पुलिस तक नहीं पहुंच पाते। थानों के चक्कर काटने की बजाय कई बार चोटिल राहगीर सड़क के आसपास लगते निजी अस्पताल या सीएचसी मथाना-लाडवा में इलाज कराकर गंतव्य को निकल जाते हैं।
अधिकारियों के संज्ञान में लाई जाती रही समस्या
अमर उजाला द्वारा पिछले 11 माह के अंतराल में राहगीरों की सुरक्षा को लेकर विभाग के संज्ञान में समय-समय पर यह समस्या लाई जाती रही। वहीं अधिकारी हर बार बरसाती सीजन के चलते काम में देरी की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहे। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि राहगीर भगवान भरोसे या फिर अपने माता-पिता को याद करके बस किसी तरह सफर पूरा करने को मजबूर हैं। इस 11 माह के अंतराल में जान हथेली पर रखकर वाहन चलाते समय औसतन तीन से चार लोग रोजाना दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद वाहन चालक अपनी नौकरीपेशा जिंदगी को पल-पल पास से गुजरती मौत के साथ बड़ी मुश्किल से आगे बढ़ाने को विवश हैं, लेकिन पीडब्ल्यूडी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
आपात सेवा के लिए न एंबुलेंस, न पुलिस, न सड़क सुरक्षा संगठन, न सामाजिक संस्थाएं आई आगे
प्रतिस्पर्धा के दौर में राजनीतिक एवं सामाजिक छवि को दमदार दिखाने करने के लिए सरकार के नुमाइंदों के विकास संबंधी तेजस तर्रार दावों की भी सरकारी सिस्टम ने हवा निकाल दी। कारण ये कि लटके पिपली-लाडवा रोड के निर्माण कार्य के दौरान राहगीरों की सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है। मिलिंग हुई सड़क को दो माह से दुरुस्त नहीं किया। वहीं सड़क पर गड्ढों की भी भरमार है। आए दिन वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। इसके बावजूद यहां न एंबुलेंस का प्रबंध है, न ट्रैफिक पुलिस और न सड़क सुरक्षा संगठन का कोई नुमाइंदा। सड़क के बीचोंबीच खुदाई किया डिवाइडर भी जानलेवा हालात बनाने में पीछे नहीं है। इसके आसपास भी सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है।
ओवरलोडिंग वाहनों की भरमार के अलावा ओवरटेकिंग करने वाले भी नहीं पीछे
पिपली-लाडवा हाइवे पर ओवरलोड वाहनों का सिलसिला भी दिन-रात नहीं थमता। शाम के समय से इसमें और ज्यादा तेजी आने लगती है, जिस कारण अंधेरे में चलते दोपहिया एवं अन्य छोटे वाहनों ओवरलोड वाहनों का खतरा बना रहता है। इस पर रोकथाम के लिए पुलिस का कोई भी कर्मचारी रोड पर नहीं होता, जिसके चलते भारी वाहन एवं ओवरलोड ट्रक, ट्राले तथा अन्य फॉर व्हीलर से छोटे वाहन चालकों की जान सांसत में बनी रहती है।
विभाग गंभीर, 15 जनवरी तक कंपलीट करा देंगे पिपली-लाडवा रोड का निर्माण कार्य: एक्सईएन
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन अमित मनुजा ने कहा कि पिपली-लाडवा रोड पर निर्माण कार्य जल्दी कराने को लेकर विभाग पूर्णत: गंभीर है। निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। सुरक्षा संबंधी समस्याओं पर संज्ञान लेकर जल्द ही रिफ्लेक्टर इत्यादि लगवाने का प्रबंध कराएंगे। प्रयास रहेगा कि रोड को 15 जनवरी तक हर हाल में कंपलीट करके जनता के सुपुर्द किया जाए। राहगीरों की सुरक्षा बहुत जरूरी है, इसलिए डिवाइडर के आसपास रिफ्लेक्टर लगवाने के अलावा बेरीकेडिंग की व्यवस्था करेंगे।