आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्परों ने गाने गाकर सरकार को कोसा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
आंगनबाड़ी वर्करों, हेल्परों और खाना बनाने वाली मदर ग्रुप की महिलाओं का धरना प्रदर्शन रविवार को सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनरत महिलाओं ने बिरला मंदिर सड़क पर जाम लगाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सभी ने गाने गाकर सरकार को कोसा। इस धरना प्रदर्शन में जिले भर की लगभग सभी आंगनबाड़ी वर्करों, हेल्परों और खाना बनाने वाली मदर ग्रुप की महिलाओं ने भाग लिया। ‘सड़कों पर बेटी करे पुकार मुझे भी दो मेरा अधिकार...’ जैसे नारे भी लगाए गए। महिला कर्मचारियों ने डीडीपीओ कपिल शर्मा को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
धरना प्रदर्शन के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, क्योंकि प्रशासन को आशंका थी कि कहीं आंगनबाड़ी वर्कर मुख्य सड़क पर जाम न लगा दें। महिला कर्मचारियों ने गीतों के माध्यम से सरकार पर कड़े प्रहार किए। ज्ञात रहे कि जिला भर की आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर पिछले सात दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं। पिछले दिनों से आंगनबाड़ी वर्कर शहर में अलग-अलग स्थानों पर धरना प्रदर्शन कर रही हैं। इसी कड़ी में उन्होंने रविवार को बिरला मंदिर चौक पर प्रदर्शन किया।
धरने का नेतृत्व करते हुए आंगनबाड़ी वर्कर यूनियन की जिला सचिव कलावती ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि वह कच्चे कर्मचारियों को पक्का करेगी, लेकिन सरकार अपने वादे से मुकर रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का यह आंदोलन पूरे हरियाणा में हो रहा है। अब वह अपना हक लेकर ही रहेंगी। यदि सरकार ने उनके इस आंदोलन को दबाने की कोशिश की तो महिलाएं उनकी ईंट से ईंट बजा देंगी। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे शांतिपूर्ण ढंग से कानून के दायरे में रहकर अपना आंदोलन चला रही हैं। इसलिए उन्हें दबाने की कोशिश न की जाए। वे अब किसी से भी दबने वाली नहीं हैं। यूनियन की नेता परमजीत ने केंद्र और प्रदेश सरकार को महिला विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के नाम पर तो आंगनबाड़ी वर्करों को सबसे पहले याद किया जाता है, लेकिन वेतन के नाम पर उनकी अनदेखी की जाती रही है। उन्होंने कहा कि वैसे तो सरकार महिलाओं को पुरुष के बराबर दर्जा देने की बात करती है, लेकिन जब वेतन और अन्य सुविधाओं की बात आती है तो उनके साथ अन्याय किया जाता रहा है। आंगनबाड़ी वर्कर यूनियन की नेता बलजीत ने कहा कि जब तक सरकार आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी घोषित नहीं करती, तब तक वे संघर्ष करती रहेंगी। उन्होंने मांग की कि जब तक उन्हें कर्मचारी घोषित नहीं किया जाता तब तक उन्हें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन आंगनबाड़ी वर्कर को 18 हजार रुपये और हेल्पर को 15 हजार रुपये दिया जाए।