श्रीलंका के महीन कुदरती पत्थरों से बनी तस्वीरों के मुरीद हुए पर्यटक
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
पर्यटक श्रीलंका के सूक्ष्म और महीन कुदरती पत्थरों से बनी तस्वीरों के पर्यटक मुरीद हो गए हैं। इस महोत्सव में पर्यटकों के लिए कलाकृतियों और तस्वीरों को पहली बार श्रीलंका के शिल्पकार इंदिका लेकर आए हैं। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2017 में श्रीलंका के शिल्पकार इंदिका को शिल्पकला फांउडेशन श्रीलंका के निदेशक डॉ. बुद्धिकीर्ति ने निमंत्रण भेजा। इस शिल्पकार को पहली बार भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि कुरुक्षेत्र में अपनी बेहतरीन कलाकृतियों और तस्वीरों को स्टाल नंबर 47 और 48 पर लेकर शिल्पकार इंदिका पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि श्रीलंका के सूक्ष्म और महीन कुदरती पत्थरों से कलाकृतियां और तस्वीरें बनाने का काम सालों से कर रहे हैं। इस महोत्सव का निमंत्रण मिलने के बाद पर्यटकों के लिए विशेष कलाकृतियां और तस्वीरें बनाकर लाए हैं। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में भाषा के समझने और बोलने में बेशक परेशानी पेश आ रही हैं, लेकिन पर्यटकों के हावभाव और प्यार के आगे भाषा की समस्या भी छोटी सी दिखाई पड़ती है। अंग्रेजी की भाषा से बातचीत और समझने में ज्यादा परेशानी नहीं आती। उन्होंने बताया कि उनकी कलाकृति और तस्वीरों की कीमत 500 रुपए, पांच हजार और 20 हजार रुपये तक है। उनको कलाकृति और तस्वीर बनाने में सात दिन से लेकर एक माह तक का समय लग जाता है। उनके साथ श्रीलंका से महिला शिल्पकार कांतिलता भी आई हैं।
500 रुपए से 20 हजार तक की सिल्क की साड़ियां
तेलंगाना हैदराबाद के शिल्पकार के हाथों से बनाई गई सिल्क की साड़ियों ने उसे संत कबीर अवॉर्ड दिलाने में अहम रोल अदा किया । तेलंगाना के शिल्पकार रापोलु रामालिंगम को वर्ष 2012 में हैंडलूम का राष्ट्रीय संत कबीर अवार्ड हासिल करने का गौरव प्राप्त हुआ। इतना ही नहीं शिल्पकार रोपालु को सात अगस्त 2015 को राष्ट्रीय हैंडलूम डे पर भी प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह अवार्ड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों चेन्नई में हासिल हुआ। शिल्पकार रोपालु रामालिंगम ने ब्रहमसरोवर के पावन तट पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2017 में स्टाल नंबर सात महिला पर्यटकों के लिए सिल्क की साड़ियां और अन्य उत्पाद विशेष तौर पर रखे हैं। उन्होंने बताया कि हैदराबाद में हाथ से सिल्क की साड़ियां बनाने का उनका पुस्तैनी कार्य है। वह इस महोत्सव में पिछले पांच सालों से लगातार आ रहे हैं। इसके अलावा हरियाणा के फरीदाबाद में लगने वाले सूरजकुंड मेले और चंडीगढ़ में लगने वाले मेलों में भी पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव में महिला पर्यटकों के लिए पोचुम-पल्ली टाई और डाई सिल्क की साड़ियां विशेष तौर पर लाए हैं। इसके अलावा कॉटन की साडिय़ां और महिलाओं के पसंदीदा अन्य उत्पाद भी लेकर आए हैं। इस बार उन्होंने साड़ी का दाम 500 रुपए से लेकर 20 हजार रुपये तक हैं।
पीतल में रंग बिरंगे कीमती पत्थरों से बना कृष्ण अर्जुन का रथ
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2017 में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को पीतल की श्रीकृष्ण-राधा के दर्शन हुए। इतना ही नहीं भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न प्रकार की सुंदर-सुंदर मूर्तियां भी पर्यटकों को देखने और खरीदने को मिली। इन मूर्तियों को विशेष रूप से तैयार करने का काम शिल्पकार दलीप चौरसिया ने किया। शिल्पकार दलीप चौरसिया ने बातचीत करते हुए बताया कि इस महोत्सव में पर्यटकों के लिए उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष गीता महोत्सव में सभी पर्यटकों की मुख्य मांग भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियां और श्रीकृष्ण-अर्जुन रथ थी। इसलिए वे इस बार पर्यटकों के मन की इच्छा को पूरा करने के लिए विशेष तौर पर भगवान श्रीकृष्ण-राधा की मूर्तियां लेकर आए हैं। देश के 16 राज्यों के 237 शिल्पकारों की शिल्पकला से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की बगिया महक उठी हैं। इस महोत्सव में 237 शिल्पकारों में 25 राष्ट्रीय और 33 राज्य अवार्डी शिल्पकार भी पहुंचे हैं। इन सभी शिल्पकारों की कला पर्यटकों के मन को भा रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव के पहली बार पार्टनर स्टेट बने उतर प्रदेश के 77 से सबसे ज्यादा शिल्पकार भी यहां पहुंचे हैं।
क्राफ्ट मेले में खिले हैं कागज के फूल
ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर कागज से बने रंग-बिरंगे गुलाब और अन्य किस्मों के फूल अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को रंगीन बना रहे हैं। इस महोत्सव में वेस्ट बंगाल के शिल्पकार सोयलन मोदी विभिन्न प्रकार के कागज और सोलरवुड के फूलों को बनाकर पर्यटकों के लिए लेकर आए हैं। इन फूलों को बनाकर शिल्पकार सोयलन मोदी कई अवार्ड हासिल कर चुके हैं। अहम पहलू यह है कि कागजों को फल का रूप देने का काम कई सालों से कर रहे है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2017 पर वेस्ट बंगाल से आए शिल्पकार सोयलन मोदी देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए बेहतरीन रंग-बिरंगे सुंदर फुलों को तैयार करके लाए हैं। इन फुलों की कीमत भी आम पर्यटकों की पहुंच तक होगी। पिछले 10 सालों से पर्यटकों के लिए फूल बनाकर ला रहे हैं।
हरियाणा के विकास की तस्वीर नजर आएगी 29 विभागों की प्रदर्शनी में
हरियाणा के विकास की तस्वीर सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा लगाई जा रही 29 विभागों की प्रदर्शनी में नजर आएगी। इस अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2017 में राज्य के 29 विभागों द्वारा 25 नवंबर से 30 नवंबर तक राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का आयोजन ब्रह्मसरोवर के तट पर किया जाएगा। उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने बताया कि इस राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में 29 विभागों की उपलब्धियों, स्कीमों की जानकारी दी जाएगी।
मेले में हैं 16 राज्यों के 237 शिल्पकार
गीता महोत्सव के एक मंच पर देखने को मिल रही भारत की लोक संस्कृति को पर्यटक काफी पसंद कर रहे हैं। इन लोक नृत्यों में पंजाब के भांगड़ा और गिद्दा ने पर्यटकों के सामने प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी है। इस उत्सव में पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के लोक कलाकारों ने जमकर पर्यटकों का मनोरंजन किया और सभी को अपने मोहपाश में बांध दिया। अहम पहलू यह है कि एनजेडसीसी 2 राज्यों के कलाकारों के साथ गीता जयंती में वर्ष 2002 में पहुंची थी, अब 15 सालों में 12 से ज्यादा राज्यों के कलाकार महोत्सव में शिरकत कर रहे है और लगातार पर्यटकों का मन मोह रहे है। महोत्सव के पांचवें दिन मंगलवार को क्राफ्ट और सरस मेला देखने के लिए लगातार पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है।
जीने की पद्धति व जीवन का आधार है पवित्र ग्रंथ गीता : नायब
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता जीने की पद्धति के साथ-साथ जीवन का आधार हैं। जीवन की हर समस्या का समाधान पवित्र ग्रंथ गीता में मिलता हैं। राज्यमंत्री मंगलवार को गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में गांव फतुहपुर स्थित मातृभूमि सेवा मिशन आश्रम में आयोजित अंतर विद्यालयी सांस्कृतिक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस मौके पर उन्होंने आश्रम को दो लाख 51 हजार रुपए देने की घोषणा भी की। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी, आश्रम के संचालक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्रा, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गुरनाम सैनी, भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, धर्मबीर डागर, भाजपा युवा नेता गौरव बेदी ने दीपशिखा प्रज्ज्वलित करके किया।
राज्यमंत्री ने कहा कि मातृभूमि सेवा मिशन आश्रम बच्चों को संस्कारमय शिक्षा प्रदान करके उनका सर्वांगिण विकास कर रहा हैं। गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन करना एक अनुकरणीय कदम हैं। उन्होंने सुनीता विल्यिमस का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे अंतरिक्ष में गई थीं, तब वह भी अपने साथ पवित्र ग्रंथ गीता को लेकर गई थीं। उन्होंने खुद कहा था कि अंतरिक्ष में बिताए गए 175 दिनों में पवित्र ग्रंथ गीता से आत्मबल और सहारा मिला। बताया कि पहली बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 48 कोस की परिक्रमा की परिकल्पना हैं। इसके प्रथम चरण में कुरुक्षेत्र के 15 तीर्थों पर श्रृद्धालुओं के लिए बस सेवा प्रारंभ की गई है। मातृभूमि सेवा मिशन आश्रम के संचालक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्रा ने राज्यमंत्री का स्वागत किया। इस मौके पर लखविंद्र पाल ग्रेवाल, एडवोकेट रामेश्वर चहल, धर्मबीर सैनी, राम रत्न कटारिया, रामकुमार रम्भा, जयपाल शास्त्री, रमन कंबोज, डॉ. एनपी गुप्ता, संगीता गुप्ता, राजेश चौहान, सुभाष चौहान, प्रधान सिंह, कैप्टन गुरमेल सिंह, अन्नपूर्णा शर्मा, बलजीत सैनी, रितू आदि उपस्थित थे।
नोडल अधिकारी गिरीश अरोड़ा ने किया केयू सभागार का निरीक्षण
यमुनानगर नगर निगम के आयुक्त एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद् भगवद गीता सदन सभागार में होने वाले कार्यक्रम के नोडल अधिकारी गिरीश अरोड़ा ने कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण किया। मंगलवार को देर शाम एचसीएस अधिकारी गिरीश अरोड़ा ने कहा कि 25 नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। इस मौके पर कैथल के एडीसी शक्ति सिंह आदि मौजूद थे।