अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
हरियाणा सिख परिवार के प्रदेशाध्यक्ष कंवलजीत सिंह अजराना ने कहा कि भाई जैता को सिख पंथ का महान जरनैल माना गया है। दशमेश पिता ने भी उन्हें ‘रंघरेटे गुरु के बेटे’ के खिताब से नवाजा था। इसलिए युवा पीढ़ी को उनके आदर्श पर चलना चाहिए। वे रविवार को शहीद बाबा जीवन सिंह के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में पंजाबी धर्मशाला में आयोजित गुरमत समागम में संगत को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम का आयोजन शहीद बाबा जीवन सिंह शिक्षण एवं भलाई ट्रस्ट ने किया था। इससे पहले फौजी कॉलोनी के गुरुद्वारा साहिब में चल रहे श्री अखंड पाठ साहिब ने विराम लिया। इसके बाद विशाल दीवान सजाया गया। समागम में एतिहासिक गुरुद्वारा साहिब छठी पातशाही के हजूरी रागी भाई बलविंद्र सिंह और गुरबाणी कथावाचक भाई कुलविंद्र सिंह ने संगत को भाई जैता के इतिहास से जोड़ा। ढाडी जत्था भाई चरणजीत सिंह मोहनपुरी ने जोशीली वारों के माध्यम से संगत में जोश भर दिया। गुरुद्वारा नीलधारी संप्रदाय पिपली साहिब की गतका टीम ने सिख मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया। शहीद बाबा जीवन सिंह और मजहबी सिख सुधार सभा के प्रधान सूबेदार बलदेव सिंह और कैप्टन प्रगट सिंह बोधनी ने बताया कि समागम का उद्देश्य समाज की युवा पीढ़ी को भाई जैता के गौरवमयी इतिहास से अवगत कराना है।
ट्रस्ट की ओर से मुख्य अतिथि कवंलजीत सिंह अजराना, लखविंद्र सिंह संधू, कुलवंत सिंह भट्टी, रघबीर सिंह संधू, दिलबाग सिंह दबखेड़ी, मास्टर सुखदेव सिंह, करनैल सिंह आदि को भाई जैता अवार्ड से सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में दूर-दूर से पहुंची संगत के लिए गुरु के लंगर की व्यवस्था की गई थी। ट्रस्ट के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रघबीर सिंह संधू ने अतिथियों का स्वागत किया। नगर परिषद् थानेसर के उपाध्यक्ष सुरिंद्र सिंह छिन्दा ने भी समागम में शिरकत की। इस अवसर पर जसविंद्र सिंह गिल, डॉ. गुरदीप सिंह, गुरबचन सिंह, अमरीक सिंह, धर्म सिंह फौजी, सुखविंद्र सिंह उठवाल, हरचरण सिंह, मोहन सिंह खालसा, जसवंत सिंह, हरबंस सिंह, गुरचरण सिंह, सतनाम सिंह, सुखदेव सिंह भट्टी आदि मौजूद रहे।