अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में फिजूलखर्ची के आरोप एक बार फिर से सरकार पर लगे हैं। यह आरोप लगाने वाले सत्तारुढ़ दल के ही एक नेता हैं।
गीता जयंती महोत्सव के लिए डेढ़ करोड़ का मुख्य पंडाल लगाया गया है। लेकिन न ही इस तंबू का जादू चला, न सेलिब्रिटी का। प्राइवेट एजेंसी की जेब में जरूर चार करोड़ पहुंच गए हैं। इस पंडाल का निर्माण पिछले साल जिस एजेंसी ने ढाई करोड़ में तैयार किया था, उसी को अबकी बार यह काम डेढ़ करोड़ में सौंपा गया है। यह तंबू सवालों के घेरे में इसलिये है, क्योंकि देसी-विदेशी कलाकारों, फिल्मी हस्तियों और दिग्गज कवियों और आध्यात्मिक गुरुओं का आकर्षण उतने लोग खींचने में भी विफल रहा, जितने लोग इस पंडाल को लगाने और प्रबंधों में शुमार थे। पहले ही दिन से किसी कार्यक्रम में 200, तो कभी 300 या 400 या इससे कुछ और ज्यादा ही लोग इस तंबू में उपस्थिति दर्ज करा सके। पिछली बार लाइट एंड साउंड व इसके साथ तीन अन्य सेटअप पर ढाई करोड़ खर्च किया गया था। वहीं इस बार लाइट एंड साउंड का टेंडर उसी कंपनी को एक करोड़ में अन्य तीन सेटअप के अलावा दिया गया है, जिस कंपनी ने पिछली बार लाइट एंड साउंड लगाया था।
विपक्ष के साथ अपनों ने भी घेरा
अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में सरकारी धन की बर्बादी लगातार दूसरी बार कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और राज्य सरकार के गले की फांस बन सकती है। इस बार विपक्ष के साथ सत्तारुढ़ दल के एक कद्दावर नेता भी इस फिजूलखर्ची पर सवाल उठा रहे हैं। सत्तारुढ़ दल के एक नेता की मानें तो उन्होंने पिछले वर्ष भी फिजूलखर्ची का विरोध किया था और इस बार भी, मगर उनकी बात को खारिज कर दिया गया। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जितना सरकारी धन खर्च कर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2018 में सिर्फ एक पंडाल पर खर्च किया गया है, उसने में एक शानदार स्थायी ऑडिटोरियम बन सकता था। इस समय महोत्सव चल रहा है, वह चलते कार्यक्रम में कोई बखेड़ा नहीं चाहते। वैसे भी उन्होंने पहले ही कहा था कि गीता महोत्सव में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई तो वह चुप नहीं बैठेंगे। हालांकि गीता जयंती महोत्सव के बाद यह नेता जी कब तक चुप रहेंगे।
पंडाल पर चार करोड़ का खर्च, इसलिए सवालों में
लगातार दो गीता महोत्सवों में जिस प्राइवेट एजेंसी ने 2017 और 2018 में करीब पंडाल लगाया, उसका भुगतान करीब चार करोड़ रुपये बनता है। इसी तरह संयोगवश 2017 के बाद 2018 में लाइट एंड साउंड का टेंडर भी प्राइवेट एजेंसी को ही मिला। हालांकि आयोजकों द्वारा पिछले साल यह दावा किया जा रहा था कि पंडाल और लाइट एंड साउंड का अत्याधुनिक सेटअप देश में इन्हीं दोनों कंपनियों के पास है, जबकि बाद में ज्ञात हुआ कि इनसे बड़ी देश में कई ऐसी एजेंसियां हैं, जिनके पास ऐसे सेटअप उपलब्ध हैं।
बेशकीमती पंडाल में सेंसर क्यों नहीं, बड़ा प्रश्न
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में आने वाले पर्यटकों का आंकड़ा बताने के लिए आयोजकों ने एंट्री गेट पर सेंसर की व्यवस्था की है। पिछले तीन दिनों से यह गणना बताई जा रही है, लेकिन 2017 और 2018 में जिस एक पंडाल पर चार करोड़ खर्च हुए, उसमें कितने लोग आए, इसकी संख्या पर आयोजकों की चुप्पी है। बता दें कि लगान, मुन्ना भाई एमबीबीएस और गंगाजल फेम अभिनेत्री ग्रेसी सिंह के प्रोग्राम में 250 लोग, दिग्गज कवियों के सम्मेलन में 400 से भी कम लोग और संत सम्मेलन व अन्य कार्यक्रमों में चंद लोग ही पहुंचे, जबकि पंडाल में बैठने की क्षमता 5000 से ज्यादा कुर्सियों की थी। इस बार गीता जयंती महोत्सव में यह पंडाल सिर्फ सोमवार रात सतिंदर सरताज के कार्यक्रम के दौरान ही भरा।
पक्ष और विपक्ष के तेवर
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा, केडीबी के पूर्व सदस्य एवं कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग, आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विशाल खुब्बड़ का कहना है कि अगर उनकी सरकार आई तो वह इस फिजूलखर्च के पीछे के घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराएंगे और जो लोग भी दोषी होंगे उन पर सख्त कार्रवाई होगी। इन्होंने कहा राज्य सरकार आज तक गीता महोत्सव-2017 में हुए गड़बड़झालों पर संतोषजनक नहीं दे सकी। वहीं थानेसर से भाजपा विधायक सुभाष सुधा ने सिर्फ इतना ही कहा कि पंडाल पर खर्च को लेकर वह दोनों बार सहमत नहीं थे।