दो करोड़ के पंडाल में आठ हजार कुर्सियां, दर्शक आए महज 80
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में शनिवार देर शाम अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज खाली कुर्सियों के साथ हुआ। हालांकि, सबसे पहले रूस के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। हालांकि, दर्शकों की भीड़ न मिलने से उन्हें निराशा का ही सामना करना पड़ा। दो करोड़ की लागत से तैयार किए गए पंडाल में करीब आठ हजार कुर्सियां लगाई गई। इसमें वीवीआईपी से लेकर वीआईपी और अन्य श्रेणियां भी बनाई गई थीं। लेकिन, देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम के दर्शकों की संख्या करीब 80 ही रह गई। इससे पहले आरएसएस के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन कार्यक्रम के दौरान खाली कुर्सियों को छुपाने का प्रशासन भरसक प्रयास करता रहा। सैकड़ों खाली कुर्सियों के आगे आनन- फानन में कार्यक्रम के होर्डिंग लगा दिए गए। यहां तक कि वीआईपी कुर्सियां भी खाली दिखाई दीं। इसके बाद जिन सामान्य लोगों को शाम पांच बजे के करीब इस पंडाल में घुसने भी नहीं दिया जा रहा था, उन्हें इन कुर्सियों पर विराजमान करना पड़ा। भीड़ जुटाने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे। शिक्षकों को यहां बैठने को कहा तो शिक्षा विभाग के अधिकारी भी पूरे कार्यक्रम के दौरान भीड़ जुटाने के प्रयास करते रहे।
रूस के कलाकारों ने कृष्ण जन्म और कंस से जुड़े प्रसंग किए मंचित
गीता जयंती महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शनिवार को रूस और श्रीराम भारतीय कला केंद्र नई दिल्ली के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। रूस के कलाकारों ने कृष्ण जन्म और कंस से जुड़े पहलुओं को नाटक के माध्यम से उजागर किया। कंस की भूमिका में अलेक्जेंडर, वासुदेव की भूमिका में सरगई, देवकी की भूमिका में कतया आदि ने जानदार भूमिका निभाई। यह कार्यक्रम रूस के सेेंट पीटसवर्ग के गोकूला थियेटर ऑफ वैदिक कल्चरल ने आयोजित किया था। इनकी टीम लीडर साफिया जिना तुलियाना ने बताया कि उन्होंने रूस की रसियन स्टेट यूनिवर्सिटी से स्नातक किया है। वह शुरू से ही थियेटर करने में विश्वास रखती हैं। उनकी कृष्ण भगवान और भारतीय संस्कृति में आस्था है। टीम में आठ सदस्य हैं। इससे पहले वे यूक्रेन और रूस के विभिन्न स्थानों में इसका प्रदर्शन कर चुकी हैं। उनकी इस टीम में एनस्तासिया, ममयाना और असया ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। इसी तरह श्रीराम भारतीय कला केंद्र नई दिल्ली के कलाकारों ने भी बाल कृष्ण से लेकर, कंस वध, सुदामा, राजसू यज्ञ और रासलीला के विभिन्न क्रियाकलाप को पेश किया। टीम लीडर राजकुमार शर्मा ने बताया कि वे अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक बार इस नृत्य नाटिका का प्रदर्शन कर चुके हैं।