पुलिस अधिकारी बनकर सेक्टर-5 निवासी गुरमेज का अपहरण करने वाले चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने फिरौती की रकम सहित अन्य साधन बरामद किए हैं। हालांकि फिरौती में दिए गए 11 लाख में से पुलिस को 9 लाख रुपये ही मिले हैं। इसके अलावा अपहरण के लिए उपयोग की गई कार और मोबाइल भी पुलिस ने जब्त कर लिए हैं।
बकौल पुलिस प्रवक्ता, मूल रूप से समानामंडी पंजाब निवासी और हाल में कुरुक्षेत्र के सेक्टर पांच में रह रहे गुरमेज का अपहरण 23 अप्रैल को किया गया था। अपहरणकर्ता पुलिस की वर्दी में सेक्टर पांच स्थित उसके घर पहुंचे थे और किसी मामले में बातचीत करने के बहाने उसका अपहरण करके ले गए थे। गुरमेज की पत्नी सुखविंदर ने 27 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दी थी कि पुलिसकर्मी बनकर आए लोगों ने उसके पति का अपहरण कर लिया है और फिरौती के तौर पर 25 लाख रुपये की मांग की। सुखविंदर ने अपहरणकर्ताओं को 11 लाख रुपये दे दिए थे। अपहरणकर्ताओं ने गुरमेज को सोनीपत में छोड़ दिया था। लेकिन 6 लाख रुपये और देने के लिए कह रहे थे। इसके बाद सुखविंदर ने पुलिस को शिकायत दी थी।
चार आरोपी पकड़े
सुखविंदर की शिकायत के बाद एसपी सिमरदीप सिंह ने जांच टीम का गठन किया। अपराधा शाखा एक के प्रभारी दीपेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने अपहरणकर्ताओं की खोजबीन शुरू की। इसके बाद पुलिस की टीम ने मास्टरमाइंड सहित चार आरोपियों को पकड़ा जिनमें पवन कुमार, मनजीत उर्फ प्रधान निवासी गरामिरकपुर जिला सोनीपत, सतपाल धामा उर्फ सोनू निवासी मावीकला बागपत यूपी और अनिल कुमार उर्फ पहलवान निवासी हिसावेडा बागपत यूपी शामिल हैं। इन चारों आरोपियों को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया था। पूछताछ में आरोपियों ने फिरौती की रकम सहित घटना में उपयोग की गई कार सहित अन्य जानकारी पुलिस की दी। आरोपियों की निशानदेही के बाद पुलिस ने 9 लाख रुपये, कार और मोबाइल बरामद कर लिए हैं। गुरुवार को आरोपियों का रिमांड खत्म होने पर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जेल में बनाई थी अपहरण की योजना
पुलिस के मुताबिक अपहरण मामले में तीन और आरोपी शामिल हैं। यह तीनों फिलहाल जेल में बंद हैं। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि सैदपुर निवासी सुमित, खांडा निवासी नरेंद्र और समानाबाहु निवासी प्रताप ने संगरूर जेल में बंद है। इससे पहले प्रताप एनडीपीएस एक्ट के तहत सोनीपत जेल में बंद था। इसी जेल में सोनीपत निवासी पवन भी हत्या के आरोप में बंद था। यही इन दोनों के बीच बातचीत हुई थी। बाद में प्रताप संगरूर जेल भेज दिया गया था। वहीं से उसने किसी तरह पवन के साथ अपहरण और फिरौती की योजना बनाई थी।