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केयू के 700 कर्मचारियों को नहीं मिला तीन महीने से वेतन, करोड़ों रुपये अटके

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केयू के 700 कर्मचारियों को नहीं मिला तीन महीने से वेतन, करोड़ों रुपये अटके
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। हरियाणा की सबसे पुरानी और हाल ही में ए-प्लस ग्रेड का दर्जा प्राप्त कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारी इन दिनों आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। यूनिवर्सिटी की ढुलमुल प्रक्रिया के चलते पिछले तीन माह से विभिन्न विभागों के 700 के करीब कर्मचारियों का करोड़ों का वेतन अटका हुआ है।
पुराना टेंडर खत्म होने के बाद अक्तूबर-नवंबर 2017 में आउटसोर्सिंग कर्मियों की पुन: नियुक्ति शुरू हुई थीं। इनमें चार ठेकेदारों के जरिए क्लेरिकल स्टाफ, डाटा एंट्री ऑपरेटर, लैब अटेंडेंट, लिफ्ट ऑपरेटर, मीटर रीडर, एसी मैकेनिक, कारपेंटर, पीयन, बेलदार, माली आदि की भर्ती की गई थी। एक माह की सैलरी देने के बाद कर्मियों को अगले महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया। इस स्थिति में आउटसोर्सिंग कमर्तियों को परिवार का गुजारा करना भी चुनौती बन गया है। हालांकि, आउटसोर्सिंग कर्मचारी यूनिवर्सिटी प्रशासन के इशारे पर ठेकेदारों के माध्यम से हटाए जाने के डर से खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे, लेकिन दबी जुबान में बदहाल प्रशासनिक व्यवस्था का रोना रो रहे हैं। जानकारी के अनुसार ठेकेदार आउटसोर्सिंग कर्मियों को पेमेंट करना चाहते हैं, लेकिन उनके बिलों पर यूनिवर्सिटी की ऑडिट ब्रांच ने ऑब्जेक्शन लगाया हुआ है। इसी कारण किसी कैटेगरी का दो माह तो किसी का तीन माह का वेतन रुका हुआ है।
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यूनिवर्सिटी के बिल पास न करने से बढ़ी परेशानी
क्लेरिकल स्टाफ के कई आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ठेकेदार को पहला पेमेंट अपने स्तर पर करना होती है, जोकि वह दे चुके हैं। इससे आगे की तनख्वाह के लिए ठेकेदार को बिल बनाकर यूनिवर्सिटी से पास कराना होता है, लेकिन अधिकारी बिल पास नहीं कर रहे। यूनिवर्सिटी की ढील के चलते ही करीब 224 क्लर्कों को सेलरी रुकी हुई है।
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संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाए हैं मामला : प्रवक्ता
केयू के प्रवक्ता अशोक शर्मा ने बताया कि ऑडिट में आब्जेक्शन के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। फाइनेंस ऑफिसर और अन्य संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला लाया गया है। जल्द इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
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