वरिष्ठ आईएएस अफसर अशोक खेमका ने इस बात से इनकार किया है कि वे अभिलेखागार विभाग के सचिव और महानिदेशक पद का कार्यभार किसी अन्य अफसर को सौंपेंगे।
हरियाणा सरकार ने मंगलवार को खेमका को चुनावी ड्यूटी पर भेजे जाने की बात कहते हुए इस अवधि के लिए अस्थायी रूप से उनका कार्यभार प्रशासनिक सुधार विभाग में सचिव प्रदीप कासनी को तत्काल प्रभाव से सौंपे जाने के आदेश दिए थे।
खेमका ने कहा कि अभी तक उन्हें चुनाव ड्यूटी पर नहीं भेजा गया है। इसलिए अपना मौजूदा कार्यभार किसी और को सौंपने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि वे छुट्टी पर थे और लौटकर उन्होंने अपनी मौजूदा ड्यूटी ज्वाइन कर ली है।
खेमका पिछले साल चर्चा में आए थे जब दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के जमीन सौदे की म्यूटेशन रद्द कर दी थी।
राज्य सरकार के आदेश पर सवाल उठाते हुए खेमका ने कहा कि वे चुनाव ड्यूटी पर नहीं गए हैं इसलिए उन्होंने किसी और को अपना चार्ज नहीं सौंपा है।
1991 बैच के आईएएस खेमका ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि वे पिछले शनिवार से मंगलवार तक छुट्टी पर थे और उन्होंने बुधवार को अभिलेखागार महानिदेशक और सचिव पद की ड्यूटी फिर ज्वाइन कर ली है।
खेमका ने जोर देकर कहा कि अगर वे चुनाव ड्यूटी पर नहीं गए हैं तो राज्य सरकार जबरन किसी और को उनका चार्ज नहीं सौंप सकती।
40 बार से ज्यादा बार ट्रांसफर किए गए खेमका इन दिनों राज्य सरकार के निशाने पर हैं और हरियाणा बीज विकास निगम में एमडी रहते हुए गेहूं का बीज कम बिकने और वाड्रा-डीएलएफ सौदे के संबंध में अधिकारक्षेत्र से बाहर जाकर फैसला करने के आरोप में उन्हें चार्जशीट देने की तैयारी है।