करनाल/इंद्री। यमुनानगर के औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियों से निकलने वाला गंदा और जहरीला काला पानी करनाल के लोगों की जान ले रहा है। आसपास के करीब 32 गांव के एक लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। यमुनानगर के इस जहरीले पानी को धनौरा एस्केप से करनाल के रास्ते जड़ौली गांव के पास यमुना में गिराया जा रहा है। कच्ची पड़ी इस माइनर से इंद्री खंड के गांवों का भूजल खराब हो रहा है। लोगों का कहना है कि पिछले चार साल में गंदे पानी को पीने की वजह से करीब 25 से 30 लोगों की मौत चुकी है। सैकड़ों लोग बीमार हैं। नवजात शिशु मां के गर्भ से ही चर्म रोग के साथ जन्म ले रहे हैं।
इस गंदे नाले की दुर्गंध तीन किलोमीटर दायरे में रहने वाले हर ग्रामीण को प्रभावित कर रही है। जब इस नाले का काला पानी यमुना में जाता है तो दोनों पानी का रंग स्पष्ट तौर पर अलग देखा जा सकता है। ग्रामीणों ने इसके समाधान को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर एनजीटी को कई बार पत्राचार भी किया लेकिन आज तक न तो उनका कोई जवाब आया और न ही समाधान मिल पाया। हालांकि प्रधानमंत्री को पत्राचार के बाद एक माह के लिए तो इसमें गंदा पानी बंद किया गया लेकिन इसका स्थायी समाधान आज तक नहीं मिल पाया है।
सीएम को पानी पीने का न्योता देकर ग्रामीण कर चुके हैं आंदोलन
यमुनानगर के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को यमुना में विसर्जित कराने के लिए करनाल सीमावर्ती गांव से एक मानइर की वर्ष 2014 में खुदाई कराई गई थी। इसका नाम धनौरा एक्सकेप रखा गया। इससे शेगढ़ टापू और डबकौली में मिट्टी कटाव, जल प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने लगीं। किसानों ने प्रदूषण रोकने के लिए मुख्यमंत्री को इस पानी को पीने का न्योता देकर विरोध प्रदर्शन भी किया है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि यह पानी उनकी फसलों और भूजल को खराब कर रहा है। कई आंदोलनों के बावजूद समस्या जस की तस बनी है।
लोगों की पीड़ा
एस्केप के गंदे पानी के कारण पिछले काफी वर्षों से चर्म रोग से परेशान हूं। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में यमुना का पानी पीने लायक बताया था अगर हिम्मत है तो वह जड़ौली गांव के पास जहां धनौरा एस्केप का पानी यमुना में मिलता है, वहां का पानी पीकर दिखाएं। -दिलावर
- दोनों टांगों पर एलर्जी के कारण दाद जैसे निशान हो गए हैं। उपचार के लिए चंडीगढ़ तक दिखा चुका हूं। डाॅक्टर ने नाले की दुर्गंध और पानी से परहेज बताया है। गांव छोड़कर कहां जाएं। - जोगिंद्र
- गांव में जन्मे नवजात भी अब चर्म रोग का शिकार हो रहे हैं। एस्केप के पानी से उठने वाली दुर्गंध से लोग दमे व कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। - प्रवीन
- एनजीटी की टीम दो बार गांव का दौरा कर चुकी है लेकिन अभी तक इस रसायनयुक्त पानी को रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। सुनवाई नहीं हो रही। - सूरत सिंह
- चेहरे से शुरू हुई एलर्जी सारे बदन पर फैल चुकी हैं। बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। एस्केप से आने वाली हवा से ही सारे शरीर में खुजली होने लगती है। - ऊषा देवी
- धनौरा एस्केप के गंदे पानी के कारण कई गांवों के लोग परेशान हैं। अधिकारियों और विधायक सभी को कई बार समस्या से अवगत करा चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। - बलबीर सिंह
वर्जन-
धनौरा एस्केप में आने वाला गंदा पानी यमुनानगर के कारखानों से आ रहा है। यमुनानगर में दो एसटीपी लगाने की योजना है। अगर वहां एसटीपी लगता है तो इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। -मनोज कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग