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Karnal News: रात को बढ़ा यमुना का जलस्तर, डंपर और जेसीबी डूबे, तीन चालक बचाए

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Yamuna water level increased at night, dumper and JCB drowned, three drivers were rescued - फोटो : Yamuna water level increased at night, dumper and JCB drowned, three drivers were rescued
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- हथिनी कुंड बैराज से छोड़ा गया था 18 हजार क्यूसेक पानी, यमुना किनारे बसे इलाकों में अलर्ट जारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ढाकवाला गांव के पास सोमवार की रात ढाई बजे यमुना नदी में अचानक जलस्तर बढ़ गया। इस कारण रेत भरने के लिए खड़े तीन डंपर और एक जेसीबी डूब गईं। इसमें फंसे तीन चालकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। ये चालक इन्हीं में सो रहे थे। सिंचाई विभाग के अधिकारी ने बताया कि हथिनी कुंड बैराज से 18 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से यमुना का जलस्तर बढ़ा है। वहीं यमुना के किनारे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जलस्तर एकदम तेजी से बढ़ा और डंपरों में सो रहे चालकों को बचाव का मौका तक नहीं मिला। जैसे ही गाड़ियों में पानी भरना शुरू हुआ चालक तुरंत जागे और डंपरों की छतों पर चढ़ गए। इसके बाद उन्होंने साथी कर्मचारियों को फोन करके मौके पर बुलाया और किश्ती की मदद से तीन चालकों को रेस्क्यू करके निकाला गया। यह घटना रात ढाई बजे की है।
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पहाड़ों में बारिश के बाद जब यमुनानगर का जल स्तर बढ़ जाता है तो हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ दिया जाता है। करनाल खंड का ढाकवाला गांव का क्षेत्र हरियाणा और यूपी की सीमा से सटा है, जहां यमुना से रेत खनन का कार्य चल रहा है। रोजाना सुबह जल्दी नंबर लगाने के लिए ड्राइवर अपनी गाड़ियां रात को ही यमुना के अंदर खड़ी कर देते हैं और गाड़ियों में सो जाते हैं। रविवार रात को भी यहां चालक जेसीबी में सोए थे। जैसे ही पानी तेजी से आया पूरी साइट को चपेट में ले लिया। घटना पर माइनिंग साइट के सुपरवाइजर लख्मीचंद ने बताया कि आमतौर पर हथिनी कुंड बैराज से अलर्ट आता है कि पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन इस बार कोई अलर्ट नहीं आया। उन्होंने कहा कि रात ढाई बजे चालकों ने कॉल करके स्थिति की जानकारी दी और बताया कि यमुना में पानी आ गया है।

पॉकलेन मशीनों की मदद से जेसीबी और डंपरों को निकाला
प्रशासन और साइट कर्मियों की मदद से पानी में फंसे डंपरों और जेसीबी को पॉकलेन मशीनों की मदद से निकाला गया। पहले पॉकलेन से जेसीबी और डंपरों तक रेत डालकर रास्ता तैयार किया गया। फिर एक-एक करके गाड़ियों को बाहर निकाला गया। करीब दो घंटे तक यह कार्य चला। माइनिंग का काम मंगलवार सुबह सात बजे बंद करवा दिया गया। साइट पर किसी प्रकार के प्रवेश के लिए मनाही है ताकि कोई हादसा न हो।
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मानसून के समय हर बार हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ दिया जाता है। ऐसे समय में यमुना में रेत के लिए रात को वाहन खड़े करना गलत है। माइनिंग विभाग की ओर से भी इस बारे हर बार अलर्ट किया जाता है। जिला में यमुना के तटबंधों को मजबूत कर दिया गया है, कुछ जगहों पर पत्थर डंपिंग का कार्य चल रहा है। बाढ़ जैसे हालात से निपटने के लिए सभी तरह के पुख्ता इंतजाम हैं।
- मनोज कुमार, कार्यकारी अधिकारी, सिंचाई विभाग
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