लॉकडाउन से नदियों का जल स्वच्छ हुआ है। इसमें दो राय नहीं कि करोड़ों रुपये व्यय करने के बावजूद नदियों के जल को इतना स्वच्छ बनाना मुश्किल था। यह कार्य प्रकृति ने स्वयं ही कर दिया है। यमुना नदी के जल का करनाल और यमुना नगर के बीच हाल ही में बीओडी और सीओडी टेस्ट किया गया। इसमें पाया गया कि यमुना का जल अभी पीने योग्य नहीं है, अलबत्ता नहाने योग्य जरूर हो गया है।
लॉकडाउन के कारण अधिकांश बड़ी औद्योगिक इकाइयाें का संचालन लंबे समय से बंद है, लॉकडाउन 3.0 में छूट मिलने के बावजूद बड़े उद्योग अपेक्षित गति से शुरू नहीं हो सके है। यदि हम लॉकडाउन 2.0 के अंतिम दिनों की बात करें तो भी कहीं न कहीं जल की शुद्धता के आंकड़े बताते हैं कि अभी यमुना प्रदूषित हो रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल आफीसर निर्मल कश्यप बताते हैं कि किसी भी नदी के जल की शुद्धता को पैमाने पर नापा जाता है, एक बीओडी यानी बायोलॉजिकल आक्सीजन डिमांड और दूसरा सीओडी यानी केमिकल आक्सीजन डिमांड। हाल ही में यमुना नदी के जल का करनाल और यमुना नगर के बीच टेस्ट किया गया। इसमें बीओडी तो शून्य पाया गया लेकिन सीओडी 7 पाया गया है, जबकि पिछले साल बीओडी 7 से 8 और सीओडी 15 एमजी प्रति लीटर था। मालूम हो कि यमुना में पिछले दिनों की अपेक्षा जलस्तर बढ़ा है। यमुना ने उत्तर प्रदेश की बजाय इस बार हरियाणा राज्य की ओर अधिक बहाव दिया है।
पीने योग्य पानी तब माना जाता है, जब जल का बीओडी और सीओडी दोनों ही शून्य हों। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि बीओडी तीन तक हो तो जल पीने योग्य तो नहीं लेकिन नहाने योग्य जरूर हो जाता है। हालांकि बीओडी अभी शून्य है लेकिन सीओडी सात तक है, जिसके कारण जल को पीने योग्य तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन नहाने लायक जरूर कहा जा सकता है।
अभी हो रहा है यमुना के जल में प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि फैक्ट्रियों से आने वाला प्रदूषण तो फिलहाल नहीं आ रहा है लेकिन शहरों के सीवर, नालों से जाने वाले प्रदूषण अभी यमुना के जल में प्रवाहित हो रहे हैं, जिससे केमिकल युक्त प्रदूषण लगातार जारी है। -लॉकडाउन के कारण यमुना का पानी साफ तो हुआ है लेकिन अभी नहाने योग्य ही है। जल को पीने योग्य बनाने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की आवश्यकता है। फैक्ट्रियों के प्रदूषण को रोकना होगा। तभी जाकर स्थिति में सुधार होगा। अब तो फिर इंडस्ट्रियां भी चलने लगी हैं।
-निर्मल कश्यप, रीजनल आफीसर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।