कई दिनों से शांत चल रही यमुना नदी में बुधवार रात को लाखों क्यूसेक पानी आने से उफान आ गया। इससे इंद्री क्षेत्र की दर्जनों एकड़ फसल जलमग्र हो गई। फसलों में पानी घुसने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। वीरवार को पानी अधिक आने से कई किसानों की फसल जलमग्र हो गई। इससे वह नष्ट होने की स्थिति में है। किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही है।
बुधवार दोपहर को हथनीकुंड बैराज से 1 लाख 54 हजार क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया था, जिसने इंद्री के यमुना क्षेत्र में तबाही मचाई। पानी ने किसानों की कई एकड़ फसल को बर्बाद कर दिया। पहाड़ों में चल रही लगातार बरसात से यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा है। जल स्तर बढ़ने से यमुना का पानी किनारों से बाहर निकल गया और पानी ने नजदीक लगते खेतों में खड़ी मक्का, गन्ना, जीरी, घास आदि फसल डूबो दी। किसान अपनी फसल को बर्बाद होता नहीं देख पा रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले आए पानी भी हमारी फसल को नुकसान पहुंचाया था और बुधवार को आए पानी ने काफी एकड़ फसल को तबाह कर दिया है।
एक्सईएन मनीष शर्मा ने बताया कि बुधवार को 1 लाख 54 हजार क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया था। वीरवार के दिन करीब 15 हजार क्यूसिक पानी यमुना नदी में बह रहा था। अचानक 1 लाख 54 हजार क्यूसेक पानी आ जाने से जलस्तर बढ़ा है। इसको लेकर पूरी व्यवस्था की गई है। किसानों को घबराने वाली कोई बात नहीं है। फिलहाल खतरे की कोई बात नहीं है।
क्या कहते हैं किसान
किसान राजकुमार ने बताया कि मेरी यमुना के नजदीक हमारी 20 एकड़ जमीन है। इसमें काफी हिस्से में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी आ गया है। अगर पानी थोड़ा और बढ़ा तो सारी फसल नष्ट हो जाएगी। इसलिए वह सरकार से फसल को नष्ट होने से बचाने के लिए उचित व्यवस्था की मांग करते है।
किसान कुलविंद्र ने बताया कि मेरे पास यमुना क्षेत्र में 8 एकड़ जमीन है। जो सारी यमुना के पानी में चली गई है। मैंने इसमें तरबूज और अन्य कुछ सब्जियां लगाई थी। यमुना किनारे होने के कारण फसल में पानी भर गया और वह पूरी तरह से नष्ट हो गई। वह प्रशासन से मुआवजे की मांग करते हैं।