निजी स्कूल आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को 134ए नियम के तहत दाखिला देने के एवज में सरकार से बजट मांगकर अपने ही जाल में फंस गए हैं। निजी स्कूलों की मांग पर सहमति देते हुए विभाग ने सभी स्कूलों के लिए बजट तो आवंटित कर दिया है, लेकिन उससे पहले विभाग ने इन स्कूलों से वर्ष 2013 से अब तक इस नियम के अनुसार दाखिल किए गए छात्रों की पूरी जानकारी मांग ली हैै। वह भी आधार नंबर के साथ। स्कूल संचालकों को अभी तक दाखिल किए गए सभी छात्रों की जानकारी एमआईएस (मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) पोर्टल पर आधार नंबर के साथ अपलोड करना होगा। इसके बाद विभाग गलत एनरॉलमेंट देने वाले सभी स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगा।
शिक्षा विभाग ने यह कदम आरटीआई एक्ट 134ए के तहत दाखिला देने में निजी स्कूलों की ओर से किए जा रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया है। विभाग अभी तक दाखिले के बाद निजी स्कूलों से सिर्फ दाखिल किए गए छात्रों की संख्या की ही जानकारी मांगता था और यह सुनिश्चित करता था कि इस नियम के अनुसार आरक्षित 10 फीसदी सीटें भर गईं कि नहीं। कई स्कूल संचालक विभाग के इस नरम रवैये का फायदा उठाकर छात्र संख्या की गलत जानकारी देते थे। विभाग ने इस बार सभी स्कूलों से 2013 से अब तक 134ए नियम के तहत दाखिल किए गए सभी छात्रों की जानकारी उनके आधार कार्ड नंबर के साथ मांगी है। आधार नंबर मिलने के बाद विभाग पूरी जानकारी को वेरिफाई करेगा। जो स्कूल गलत जानकारी देंगे, उन पर विभाग फर्जीवाड़ा के आरोप में एफआईआर दर्ज कराएगा। इसके अलावा जो स्कूल छात्रों के पूर्व में हुए दाखिले की पूरी जानकारी नहीं दे पाएंगे, उन पर भी विभाग एफआईआर दर्ज कराएगा। मतलब अब तक बच्चों के एनरॉलमेंट में फर्जीवाड़ा कर सरकार से बजट पाने की उम्मीद लिए बैठे निजी स्कूल हर हाल में नपेंगे।
स्कूल नहीं दे पा रहे छात्रों के आधार नंबर की जानकारी
शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों को एमआईएस पोर्टल पर दाखिल किए गए छात्रों की पूरी जानकारी 10 फरवरी तक अपलोड करने का निर्देश दिया था। लेकिन समय पूरा होने तक आधे से कम स्कूल ही छात्रों के आधार की जानकारी दे पाए। निजी स्कूलों ने विभाग को जो पहले आंकड़े उपलब्ध कराए थे, उसके अनुसार जिले में शिक्षा सत्र 2016-17 के दौरान कक्षा पहली से आठवीं तक 1,089 छात्रों को दाखिला दिया गया था। वहीं 9वीं से 12वीं तक की कक्षा में लगभग 300 छात्रों को दाखिला मिला था। लेकिन अब निजी स्कूल एमआईएस पोर्टल पर छात्रों के आधार नंबर के साथ जो आंकड़े उपलब्ध करा रहे हैं। उसके अनुसार इस सत्र में भी स्कूलों ने फर्जीवाड़ा किया है। एक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अभी तक सिर्फ 50 से 60 फीसदी स्कूलों ने ही जायज दाखिले दिए जाते थे। अब सभी विभाग के कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
बजट मांग कर फंसे निजी स्कूल
आरटीआई एक्ट 134ए जबसे लागू हुआ है, तबसे शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों की बीच टकराव चल रहा है। दाखिले पर सहमति तो बन गई ,लेकिन इसके लिए निजी स्कूलों ने सरकार से बजट मांग लिया। सरकार ने भी स्कूल संचालकों को निराश नहीं किया और प्राप्त दाखिला आंकड़ों के अनुसार स्कूलों के लिए बजट आवंटित कर दिया। वर्ष 2015-16 के लिए विभाग की तरफ से राज्य के सभी स्कूलों के लिए 6.82 करोड़ का बजट दिया किया। इसमें से करनाल के लिए 5932800 रुपये जारी हुए। लेकिन अभी तक यह बजट विभाग के खजाने में ही पड़ा है। सरकार ने बजट देने से पहले छात्रों की पूरी जानकारी मांग ली। इस बजट में ग्रामीण क्षेत्र के निजी स्कूलों को पहली से पांचवीं कक्षा तक 200 रुपये और छठी से आठवीं तक 300 रुपये प्रति विद्यार्थी मिलेगा। शहरी क्षेत्र में यह राशि 300 व 400 रुपये है। वहीं 9वीं से 12वीं तक के स्कूलों के लिए यह राशि 500 से 600 रुपये है।
निजी स्कूलों को दाखिल किए गए सभी छात्रों की पूरी जानकारी एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया है। जो स्कूल छात्रों की जानकारी नहीं दे पाएंगे और जांच के दौरान फर्जीवाड़ा में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ विभाग एफआईआर दर्ज कराएगा।
- सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी