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1162 कर्मियों की हड़ताल, प्राइवेट कर्मियों ने संभाला मोर्चा

Thu, 30 Jun 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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1162 कर्मियों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में बिजली निगम की 23 डिवीजनों के निजीकरण के विरोध में बुधवार को जिले के तीनों डिवीजनों से 1162 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल का सीएम सिटी पर कोई असर दिखाई नहीं पड़ा। निगम प्रशासन द्वारा तीनों डिवीजनों पर व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पहले ही प्राइवेट कर्मियों ने व्यवस्था को संभाला। इससे शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में उपभोक्ताओं को सामान्य से अधिक बिजली मिली तथा अघोषित कटों की रूटीन भी सामान्य से कम रही। हालांकि, बिजली कर्मियों ने आपातकालीन सेवाओं को बहाल कराने में निगम का सहयोग किया। हड़ताल के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के भी कड़े इंतजाम किए गए। निगम के सभी कार्यालयों पर पुलिस बल तैनात रहा। जिले में पूरा दिन बिजली कर्मियों ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना प्रदर्शन कर सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की। अहम बात यह रही कि बिजली निगम के सुविधा केंद्र पर और दिनों के मुकाबले आधी शिकायतें पहुंची।
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हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर यूएचवीपीएनएल व एचवीपीएनएल की छह डिवीजनों के नियमित व अनुबंध पर लगे 1830 कर्मियों में से 1162 कर्मी हड़ताल पर रहे। इससे निगम की सभी सीटें खाली नजर आयी। निगम द्वारा प्राईवेट कर्मियों के सहयोग से व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास किया। निगम अपने इस प्रयास में कामयाब भी रहा। बिजली कर्मियों के हड़ताल पर होने के बावजूद लोगों को सामान्य से अधिक बिजली मिली तथा अघोषित कटों की संख्या भी रूटीन से कम रही। हड़ताल का सबसे अधिक फायदा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को हुआ। हड़ताल की वजह से ग्रामीण क्षेत्र के सभी फीडरों पर 24 घंटो तक निर्बाध बिजली आपूर्ति मिली। ग्रामीणों ने निगम की इस व्यवस्था को कायम रखने की मांग की है।

बिजली निगम जनता को 30 हजार करोड़ के घाटे का हिसाब दे : सुभाष लांबा
सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, एनपी सिंह और देवेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बिजली कर्मियों की लड़ाई जनता के अधिकारों की लड़ाई है। जब प्रदेश का गठन हुआ तो वर्ष 1967 में बिजली बोर्ड का गठन किया गया था। बिजली बोर्ड सरकार की विभिन्न योजनाओं के चलते कई कैटेगरी के उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मुहैया करवाने के बाद भी वर्ष 1998 तक बिजली बोर्ड का घाटा सिर्फ 450 करोड़ था, लेकिन 1998 में बिजली बोर्ड को निगम बनाए जाने के बाद यह वर्ष 2016 तक निगम का घाटा 34500 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को परेशान करना बिजली कर्मियों का मकसद नहीं है, लेकिन प्रदेश सरकार निगम के वरिष्ठ अधिकारियों व पुराने नेताओं से 18 वर्षों में हुए 30 हजार करोड़ के घोटालों का हिसाब ले। उन्होंने कहा निगम का घाटा बढ़ने की वजह से ही बिजली के दाम बढ़े हैं। मौजूदा समय में बिजली की यूनिट दर नौ रुपये से भी रुपर पहुंच गई है। प्रदेश सरकार अडानी ग्रुप से तीन रुपये यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदने के बाद उपभोक्ताओं को नौ रुपये के हिसाब से बेच रही है। इसके बाद भी निगम घाटा बढ़ता जा रहा है। आखिर इस घाटे का कारण क्या है, प्रदेश की जनता को इस सवाल का जवाब मिलना चाहिए।

प्राइवेट कर्मियों ने संभाली कमान
हरियाण ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर बुधवार को जिलेभर में करीब 70 प्रतिशत कर्मी हड़ताल पर रहे। निगम द्वारा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्राइवेट कर्मियों के हाथों में कमान सौंपी। निगम का यह निर्णय सफल साबित हुआ। निगम द्वारा सुविधा केंद्र पर आने वाली शिकायतों को 15 से 20 मिनट में हल कर बेहतर बिजली आपूर्ति दी। ग्रामीण क्षेत्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति होने से ग्रामीणों के चेहरे खिले नजर आए।

जिले के किसी भी फीडर नहीं हुआ ब्रेक डाउन
जिले की तीनों डिवीजनों के करीब 700 फीडरों पर 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति हुई। कृषि फीडरों से लेकर घरेलू व औद्योगिक फीडरों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति हुई। निगम द्वारा सुविधा केंद्र पर आने वाली शिकायतों का भी 15 से 20 मिनट में समाधान कर दिया। बिजली की बेहतर आपूर्ति से लोगों के चेहरे भी खिले नजर आए।

सुरक्षा के भी रहे पुख्ता इंतजाम
एस्मा लगाए जाने के बाद भी बिजली कर्मियों की हड़ताल होने पर प्रशासन द्वारा सभी स्टेशनों पर पुलिस बल की तैनाती की गई। पावर स्टेशनों और निगम कार्यालय के बाहर आधी रात से ही पुलिस की टीमें पहुंच गई थी। बिजली कर्मी दिनभर कर्ण पार्क में धरना प्रदर्शन करते रहे और पुलिस कर्मी निगम कार्यालयों के बाहर डेरा डाले रहे।

वर्जन
हड़ताल को लेकर पहले ही सभी तैयारियां पूरी कर ली थी। इसलिए बिजली आपूर्ति को लेकर कहीं पर भी कोई परेशानी नहीं हुई है। उपभोक्ताओं को बेहतर सर्विस मुहैया कराने के लिए प्रत्येक डिवीजन पर 20 प्राइवेट कर्मी भी हायर किए गए हैं, ताकि फाल्ट आने पर उसे तुरंत ठीक किया जा सके। हड़ताल के दौरान उपभोक्ताओं को कोई भी परेशानी नहीं होगी।
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- जेके कांबोज, एसई बिजली निगम करनाल।
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