माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन पिछले शिक्षा सत्र में बच्चों को खिलाए गए मिड डे मील का अब तक बजट जारी नहीं हुआ है। यही नहीं मिड डे मील तैयार करने वाले वर्करों को भी इतने समय से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही बच्चों के निवाले पर भी संकट आ गया है और वर्करों का वेतन के अभाव में घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।
विद्यार्थियों के लिए पकने वाले मिड डे मील का राशन तो स्कूल अपने स्तर पर खरीद रहे हैं, लेकिन वर्करों का वेतन न आने से दिक्कत हो रही है। हालात यह हैं कि इससे पहले भी जुलाई से लेकर सितंबर तक तीन महीने के लिए बजट अटक गया था। इसके बाद सितंबर में सरकार ने नवंबर तक का बजट जारी किया। इसके बाद अभी तक कोई बजट नहीं आया है। हालांकि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मिड डे मील मिल रहा है। बजट के जैसी ही स्थिति मिड डे मील वर्करों के वेतन की भी है। इन दिनों कुछ वर्करों को वेतन न मिलने के कारण बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराने में भी समस्या हो रही है। विदित हो कि जिले में 779 राजकीय स्कूल हैं, जहां के 98 हजार बच्चें को मिड डे मिल दिया जाता है। वहीं इन स्कूलों में करीब 1700 मिड डे मील वर्कर भी कार्यरत हैं।
ये मिलता है आहार
सरकारी स्कूल में कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को हर दिन अलग अलग पकवान दिए जाते हैं। जिसमें पूरी छोले, पूरी सब्जी, आटे का हलवा, काले चने,दाल रोटी, मीठी खीर, कढ़ी चावल, कढ़ी पकोड़ा, राजमा चावल, पौष्टिक खिचड़ी, सब्जियों का पुलाव, आटे के गुलगुले आदि शामिल हैं।
यहां खर्च होता है बजट
सरकारी स्कूलों में बच्चों को अलग-अलग पकवान दिए जाते हैं। इनमें से आटा और चावल सरकार की ओर से स्कूल को दिया जाता है। गैस सिलिंडर, नमक, मिर्च, मसाले, चीनी, ऑयल, सहित विभिन्न सब्जियां आदि खरीदने के लिए सरकारी की ओर से पर बच्चे का बजट दिया जाता है। ताकि इन रुपये से ये खाद्य सामग्री खरीदकर बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाए।
ये है बजट
कक्षा
रुपये प्रति विद्यार्थी
01 से 05वीं
5.45 रुपये
06 से 08वीं
8.17 रुपये
मिड डे मील का भी विभाग की ओर से बजट नहीं आया है। जैसे ही बजट आएगा तो सभी स्कूलों को जारी कर दिया जाएगा। जल्द ही बजट जारी होने की उम्मीद है। मिड डे मील को लेकर अभी किसी प्रकार की परेशानी नहीं आ रही है। बच्चों को नियमित मिड डे मील दिया जा रहा है। - बलजीत सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
वर्जन
यदि अब भी बजट और वेतन नहीं मिला तो भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। उन्होंने बताया कि कई वर्कर विधवा भी हैं, उन्हें वेतन न मिलने के कारण ज्यादा दिक्कत हो रही है। यदि जल्द वेतन नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा। - शिमला देवी, प्रधान, मिड डे मील वर्कर यूनियन