- बिजली संकट के चलते छोटे स्कूलों में भी की छुट्टी, कई फैक्ट्री संचालकों ने कर्मचारियों को घर भेजा
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के पहले दिन करनाल में भारी परेशानी हुई। उद्योगों से लेकर स्कूलों और आम लोगों तक को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। जिले की एक हजार से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां ठप हो गईं।
कई फैक्टरी संचालकों ने कर्मचारियों को छुट्टी देकर घर भेज दिया। बिजली के अभाव में मारुति बाल विकास स्कूल और शिव कॉलोनी सहित चार-पांच छोटे स्कूल बंद रहे। रात भर बिजली कटौती के कारण लोगों के मोबाइल फोन चार्ज नहीं हो पाए। सुबह दफ्तर जाने वाले कई लोग पानी की कमी के चलते नहा नहीं सके। औद्योगिक संगठनों ने सरकार से हड़ताल खत्म करवाने और बिजली आपूर्ति सुचारु करने की मांग की है।
एचएसआईडीसी परिसर स्थित बिजली घर पर विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन किया। लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष अभिषेक गुप्ता ने कहा कि सरकार को हड़ताल को देखते हुए पहले से वैकल्पिक इंतजाम करने चाहिए थे। उन्होंने बताया कि बिजली न मिलने के कारण औद्योगिक इकाइयों में काम बंद पड़ा है। दवा, कृषि उपकरण निर्माण, चावल और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर इसका गंभीर असर पड़ा है।
सरकार से तत्काल समाधान की मांग
काइमा के प्रधान मनीष गाबा ने कहा कि उद्योगों को बिजली संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। महासचिव अक्षित कटारिया ने सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिजली के बिल तो वसूले जा रहे हैं, लेकिन आपूर्ति बाधित होने पर उद्योगों को राहत नहीं मिल रही है। दीपक सचदेवा ने भी कर्मचारियों की हड़ताल से पैदा हुई स्थिति पर रोष जताया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विधायक जगमोहन आनंद और जिलाधिकारी से भी बातचीत की गई है। उद्यमियों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है, ताकि उद्योगों का नुकसान और न बढ़े।