माई सिटी रिपोर्टर
घरौंडा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगभग छह माह की गर्भवती महिला का अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर ही गर्भपात हो गया। परिजन ने डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मामले में सीएमओ ने जांच के आदेश दिए हैं।
बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली पिंकी अपने परिवार के साथ वर्तमान में घरौंडा में लक्ष्मी धर्मकांटा के पास किराये के मकान में रह रही हैं। रविवार को उन्हें अचानक पेट में तेज दर्द हुआ। परिजन उनको सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजन का आरोप है कि इमरजेंसी में उनकी गंभीर हालत के बावजूद केवल एक इंजेक्शन लगाकर अगले दिन आने के लिए कह दिया गया।
सोमवार को दोबारा अस्पताल पहुंचीं तो ओपीडी में भेज दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने उनकी हालत की गंभीरता को नजरअंदाज किया। ओपीडी से लौटते समय जैसे ही वह अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर पहुंचीं, उनके पेट में अचानक असहनीय दर्द उठा। वह गेट के बाहर बने चबूतरे पर बैठ गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही मिनट में उनका गर्भपात हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने स्टाफ को सूचना दी। डॉक्टर और नर्सें मौके पर पहुंचे और महिला को लेबर रूम में भर्ती किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनको करनाल के सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया।
परिजन ने जताई गलत दवा या इंजेक्शन की आशंका
महिला के ससुर रामदयाल ने बताया कि यह उनका पहला बच्चा था। यदि समय रहते उचित जांच और इलाज किया जाता तो हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने आशंका जताई कि संभव है गलत दवा या इंजेक्शन के कारण गर्भपात हुआ हो। परिजन ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जांच में पता चलेगा किसकी गलती
अस्पताल के एडिशनल एसएमओ डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि अस्पताल में एक महिला की समय से पहले डिलीवरी का मामला सामने आया है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में कोई भी कर्मचारी या चिकित्सक दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन
मामले की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। - डॉ. पूनम चौधरी, सीएमओ