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बगैर किताबों, अध्यापकों और बस्तों के लग रहे स्कूल

Sun, 17 Apr 2016 12:56 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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शिक्षा निदेशालय एक तरफ जहां स्कूल चलो का नारा देकर अधिक से अधिक बच्चों को स्कूल ले जाने का प्रयास कर रहा है। वहीं दूसरी ओर स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर इंतजाम ढीले है। शिक्षा सत्र शुरू हुए करीब आधा माह बीतने को है, लेकिन अभी तक स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं तथा जिले के अधिकतर स्कूल अध्यापकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में बिना अध्यापकों व किताबों के  इस बार भी हर बार की तरह शिक्षा सत्र की शुरुआत हुई है। अगले माह में पहली से दसवीं कक्षा का मासिक टेस्ट भी होना तय है। जिसके नंबर बच्चों की वार्षिक रिपोर्ट में जोड़े जाने हैं। लेकिन स्कूल जाने वाले बच्चों के पास न तो किताबें हैं और नही अध्यापक तो टेस्ट कै से देंगे या फिर टेस्ट कैसा होगा यह एक विचारणीय विषय है।  
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प्रवेश उत्सव के साथ ही जिले में एक अप्रैल से ही शिक्षा का नया सत्र शुरू हो गया है। लेकिन अभी तक स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं। शिक्षा निदेशालय ने हाईकोर्ट के निर्देशों पर जिले के करीब 214 अतिथि अध्यापकों को सरप्लस बताकर बाहर का रास्ता दिखा है। ऐसे में अब बिना अध्यापकों की स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई है। बच्चों के पास किताबें नहीं है, वे भी बिना बस्तों के ही स्कूल पहुंच रहे हैं। शिक्षा के सत्र की शुरूआत में ही स्कूलोें की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। जिसे पटरी पर लौटने में वक्त लगेगा।  

बिना किताबों के स्कूल पहुंच रहे बच्चे
सर्व शिक्षा अभियान की ओर से पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को यूनिफार्म, किताबें व स्टेशनरी की दी जाती है। लेकिन इस बार अभी तक स्कूलों में किताबें व स्टेशनरी नहीं पहुंची है। ऐसे में बिना किताबों व बस्तों के ही बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं। इससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है।
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बिना पढ़े ही देना होगा मासिक टेस्ट
शिक्षा निदेशालय द्वारा शिक्षा गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से पहली से दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों का मासिक टेस्ट लेने के निर्देश दिए हैं। इन्हीं टेस्टों के आधार पर ही विद्यार्थियों की वार्षिक रिपोर्ट तैयारी होती है। लेकिन जब स्कूलों में अध्यापक व किताबें ही नहीं होगी तो टेस्ट कैसे होगा। विद्यार्थियों को इस बार बिना पढ़े ही यह मासिक टेस्ट देना होगा।

फसली छुट्टियां रद्द फिर भी नहीं हो रहे दाखिले
शिक्षा निदेशालय ने गेहूं की सीजन में अध्यापकों व विद्यार्थियों के लिए निर्धारित फसली सीजन की छुट्टियों को भी रद्द कर दिया है तथा स्कूल के मुखिया व अध्यापकों को स्कूल चलो का नारा देकर अधिक से अधिक बच्चों को स्कूल में दाखिल करवाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इन तमाम प्रयासों के बाद भी राजकीय स्कूलों में एडमिशन नहीं हो रहे हैं। कई स्कूलों के सामने तो अपने अस्तित्व को बचाए रखने का खतरा हो गया है। शिक्षा विभाग पहले ही जिले में करीब 15 स्कूलों को एडमिशन न होने पर बंद कर चुका है।

सरकारी स्कूल में पढ़ाई होती नहीं, प्राइवेट में मची लूट
प्रदेश के राजकीय स्कूलों में शिक्षा स्तर निरंतर गिरता चला रहा है। ऐसे में सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोह भंग हो गया है। इसका फायदा प्राइवेट स्कूल उठा रहे हैं। निजी स्कूलों में हजारों रुपये की ट्यूशन फीस के साथ, किताब, स्टेशनरी, वर्दी व जूतों के नाम पर भी भारी लूट मची है। लेकिन अपने लाडलों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए अभिभावक यह सब सहन कर रहे हैं।

सरप्लस बताकर 214 अतिथि अध्यापक हटाए
शिक्षा निदेशालय ने हाईकोर्ट के आदेशों पर अमल करते हुए प्रदेशभर से 3581 अतिथि अध्यापकों को सरप्लस बताकर हटा दिया है। इससे जिले के विभिन्न स्कूलों से 214 अतिथि अध्यापक हटे हैं। पहले से ही अध्यापकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों के लिए यह एक और तगड़ा झटका है। जिसका प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ना स्वाभाविक है।

वर्जन
शिक्षा विभाग द्वारा जल्दी ही स्कूलों में किताबें भेजी जाएंगी। जिन स्कूलों में अध्यापकों की कमी हैं, उन स्कूलों में भी स्टाफ की व्यवस्था की जाएगी। अभी तो एडमिशन का दौर है, एडमिशन पूरा होते ही पाठ्यक्रम को मजबूती के साथ शुरू करने पर जोर दिया जाएगा।
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सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षाधिकारी करनाल।
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