संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अब ग्रामीण क्षेत्र में जलापूर्ति तय समय पर होगी। इस कार्य में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की मनमर्जी नहीं चलेगी। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह निर्णय गांवों में अतिरिक्त दोहन व नल से बहते जल की समस्या देखते हुए किया गया है।
ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए विभाग की ओर से उठाया यह कदम कितना कारगर होगा, यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। फिलहाल विभाग की ओर से कार्यशाला का आयोजन कर ग्रामीण ट्यूबवेल ऑपरेटरों को आरपीएल (रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग) पहले की सीख की मान्यता पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस नए सुधार में गांवों में जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के ट्यूबवेल से होने वाली जलापूर्ति की समय सारिणी में बदलाव किया जाएगा। इस सुधार से जहां पानी की खपत कम होगी, वहीं अतिरिक्त जल के दोहन की समस्या खत्म की जा सकेगी। गांवों में जिन नलों पर टोंटी नहीं है, इसको लगवाने की जिम्मेदारी भी ट्यूबवेल ऑपरेटर की रहेगी।
आईटीआई में ग्रामीण ट्यूबवेल ऑपरेटरों को तीसरे बैच का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पांच दिन तक 50 ग्रामीण ट्यूबवेल ऑपरेटरों का समूह सुबह 10 से शाम चार बजे तक प्रशिक्षण लेगा प्रशिक्षण के अंतिम दिन सभी ट्यूबवेल ऑपरेटरों को एक्सपोजर विजिट भी करवाई जाएगी। यह आयोजन उनके कार्य क्षमता में सुधार करने तथा कुशलता में बढ़ोतरी के लिए किया जा रहा है। जल जीवन मिशन की जिला सलाहकार नेहा ने बताया कि ऑपरेटरों के हुनर को विकसित करने, उन्हें हर समस्या व खराबी की स्थिति में निपटने व ट्यूबवेल के रखरखाव संबंधित सभी जानकारी इस प्रशिक्षण शिविर में दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए ऑपरेटरों को जरूरी निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इस मौके पर जेई लवनेश, विनोद, वेद, मिशन के खंड संसाधन समन्वयक, ट्यूबवेल ऑपरेटर, प्रशिक्षक दिनेश पाहवा मौजूद रहे।