करनाल। पुराने शहर के बाशिंदों को 286 साल बाद अपनी संपत्ति का मालिकाना हक मिलेगा। प्रदेश सरकार की शहरी क्षेत्र को लाल डोरा मुक्त करने के लिए बनी योजना को पुराने शहर में भी लागू किया जा रहा है। ऐसे में यहां की करीब पांच हजार से ज्यादा संपत्ति की अब लोग रजिस्ट्री करवा सकेंगे।
इसे लेकर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। स्थानीय लोग नियमों को पूरा करते हुए दस्तावेज जुटाने में लगे हैं। जिन्हें नगर निगम कार्यालय में जमा कराने के बाद उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से संपत्ति कार्ड जारी किया जाएगा। इसके बाद वे जमीन की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री और लोन आदि आसानी से करवा सकेंगे।
करनाल का पुराना शहर आठ द्वार (कर्ण द्वार, अर्जुन द्वार, सुभाष गेट, कलंदरी द्वार, जाटो द्वार, बांसों द्वार, जुंडला द्वार, दयालपुरा द्वार) के अंदर है। यह मुगल काल के समय का है। अब यहां जो मकान बने हुए हैं, इनमें पांचवीं से लेकर सातवीं पीढ़ी तक निवास कर रही है।
स्थानीय लोगों के पास इससे जुड़े दस्तावेज भी हैं। खास बात यह है कि पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री रहे लियाकत अली खां भी पुराने करनाल के नवाब थे। उनकी हवेली भी इसी आठ द्वारों के अंदर बसे करनाल में है। इसके अलावा मुगल और ब्रिटिश काल से जुड़ी कई निशानियां भी यहां पर मौजूद हैं। वहीं कई पुराने मकान और हवेलियां भी आज यहां खंडहर हालत में हैं।
यह है पुराने करनाल का इतिहास
मान्यता के अनुसार, करनाल शहर महाभारत के प्रसिद्ध राजा कर्ण द्वारा स्थापित किया गया था। सन् 1739 में करनाल प्रमुखता से अस्तित्व में आया, जब नादिर शाह ने करनाल में मोहम्मद शाह को हराया था। प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार, जींद के राजा गोपाल सिंह ने 1863 में करनाल पर कब्जा कर लिया और 1785 में मराठों ने करनाल में खुद को स्थापित किया था। 1795 में मराठों ने अंत में जींद के राजा भाग सिंह से करनाल शहर को जीत लिया।
1805 में अंग्रेजों ने यहां पर कब्जा किया और मंडल बनाया। करनाल को ब्रिटिश छावनी में तबदील कर दिया गया और जींद के राजा गजपत सिंह द्वारा निर्मित किले पर कब्जा कर उसे काबुल के आमिर दोस्त मोहम्मद खान के घर में परिवर्तित कर दिया। इस किले का उपयोग जेल के रूप में, घुड़सवार सेना के क्वार्टर के रूप में किया गया।