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आखिर क्यों, सीवरेज-वाटर सप्लाई की समस्या से जूझ रहा है सीएम सिटी

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शायद कोई दिन ऐसा हो जब नगर निगम कार्यालय पर सीवरेज और वाटर सप्लाई से परेशान लोग शिकायतें लेकर न पहुंचते हों। कहीं सीवर चोक है तो कहीं वाटर सप्लाई लीक है। कहीं गंदा पानी आ रहा है तो कहीं जलभराव हो रहा है। जब शिकायत पहुंचती है तो नगर निगम यथासंभव निराकरण भी करता है लेकिन सवाल है कि सीएम सिटी में ये दिक्कतें आम क्यों हो चली हैं। इनके स्थायी समाधान के लिए कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे। जबकि यहां की मेयर भी सत्तारूढ़ पार्टी की ही हैं और नगर निगम के कमिश्नर के पद पर जिले के उपायुक्त खुद बैठे हैं।
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पहले पब्लिक हेल्थ इन समस्याओं को देखता था। जिसके पास पर्याप्त स्टाफ भी था और मद भी। यहां इस विभाग के कार्यकारी अधिकारी भी अलग बैठते थे। तीन एसडीओ व सात जेई होते थे। लेकिन कई साल पहले इस विभाग को नगर निगम करनाल में शामिल कर दिया गया। उस समय तीन एसडीओ व सात जेई भी नगर निगम को मिल गए लेकिन निगम उक्त विभाग के अधिकारियों को सुविधाएं नहीं दे सका। धीरे-धीरे अधिकारियों ने यहां से अपने मुख्य विभाग में तबादला करा लिया। अब
सीवरेज व्यवस्था देखने के लिए सिर्फ एक एसडीओ व एक जेई हैं। वाटर सप्लाई की जिम्मेदारी भी एक एसडीओ व एक जेई पर ही है। सबसे अहम बात है कि विभाग के पास पहले दस स्थायी सीवरमैन थे, अब एक भी नहीं है। सीवरमैन को अनुबंध पर रखा जाता है। जो अधिकारी शेष हैं। उनके बैठने तक की व्यवस्था नहीं की गई है। किसी न किसी अधिकारी के कार्यालय में बैठकर वह किसी तरह काम करते हैं। पब्लिक डीलिंग के साथ-साथ इन्हें साइट पर भी निरीक्षण को जाना होता है। इनमें एक एसडीओ जिनके पास सीवरेज का काम है, वह अधिकांशत: फोन ही रिसीव नहीं करते हैं। पिछले दिनों 45 दिनों के अवकाश पर रहे। अब फिर 15 दिन के अवकाश पर चले गए हैं। अब बारिश के मौसम में सीवरेज समस्या का निदान करने के लिए सिर्फ जेई ही मौजूद हैं। इसके अलावा शहर में वाटर सप्लाई की भी दिक्कतें हैं, यह महत्वपूर्ण एवं सीधे जनता से जुड़ा अनुभाग होने के बावजूद मैनपावर व मशीनरी की कमी से जूझ रहा है।
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क्यों नहीं हो पा रही सीवर की सफाई ?
-सीएम सिटी होने के बावजूद इस शहर में सीवर साफ करने की कोई आधुनिक मशीन यानी सुपर सकर मशीन नहीं है। अभी तक यहां एक बकर टाइप मशीन है। लेकिन पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कोई भी सीवरमैन सीवर के अंदर जाकर सफाई नहीं करेगा। जिससे यह मशीन भी बेकार हो गई, क्योंकि इस मशीन से सफाई के दौरान सीवर के अंदर जाना ही पड़ता है। इस मशीन को एक तरफ खड़ा कर दिया है। अब सीवरमैन जैटिंग मशीन यानी पानी के प्रेशर से सफाई वाली मशीन के सहारे किसी तरह बांस बल्ली आदि से ही समस्या का निस्तारण करते हैं। इस कारण सीवरेज पाइप व मैनहोल में शिल्ट जमा हो गई है। इसके कारण जल निकासी की समस्या उत्पन्न हो गई है।
अभी तक ड्राइंग ब्रांच का कार्यालय ही नहीं खुला
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से आए अधिकारियों के पास ही ड्राइंग बनाने का महत्वपूर्ण कार्य भी है। जहां मानचित्र बनाने के साथ-साथ इस्टीमेट भी तैयार किया जाता है। लेकिन इसका अभी तक कार्यालय ही नहीं बना है। ऐसे में इस्टीमेट बनाने आदि के कार्य में भी दिक्कतें आती हैं। अनावश्यक समय लगता है. जिससे शहर के लोगों को भी बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।
पेयजलापूर्ति को लेकर बड़ी समस्या
-नगर निगम क्षेत्र में वाटर सप्लाई को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन रहता है। वाटर सप्लाई का कार्य तीन कार्यकारी अभियंताओं अक्षय भारद्वाज, सतीश शर्मा व एलसी चौहान में बंटा है। किसी की वाटर सप्लाई बाधित हो जाए। किसी को ट्यूबवेल दुरुस्त कराना हो। पाइप लाइन की दिक्कत हो जाए तो स्थानीय वाशिंदों को यह समझ नहीं आता है कि आखिर उनकी समस्या का निवारण कौन सा कार्यकारी अभियंता करेगा। इसलिए लोग बिना जानकारी के इधर उधर भटकते रहते हैं।
किसी भी शहर की सीवरेज व पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त मशीनरी व मैन पावर की आवश्यकता होती है, जिसकी नगर निगम में भारी कमी है। एक एसडीओ पहले ही 45 दिन की छुट्टी पर रहे, अब फिर 15 दिन के अवकाश पर चले गए हैं, ऐसे में मुझे सीधे सुपरवाइजर स्तर पर जाकर समस्याओं का निस्तारण कराना पड़ता है। मेरा प्रयास रहता है कि हर प्रकार की समस्या को मौके पर जाकर या सुपरवाइजर को दिशा निर्देश देकर निस्तारित कराऊं।
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-एलसी चौहान, कार्यकारी अभियंता (अतिरिक्त चार्ज सीवरेज व वाटर सप्लाई) नगर निगम
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