बरसातों में धुली सफेद जीवनरेखा, काल बने कोहरे से अंधेरे में सड़कें लाल
- तीन माह पहले बरसात में मिटी सड़कों की सफेद पट्टी उपायुक्त के आदेश पर भी नहीं लगी
- शहर से बाहर जाने वाले रास्तों समेत 25 प्रमुख मार्गों से गायब हैं सफेद पट्टियां
गगन तलवार
करनाल। तीन माह पहले बरसात में सड़कों से कोहरे में जीवनरेखा मानी जाने वाली सफेद पट्टियां जलभराव में धुल गईं। लेकिन प्रशासन ने अभी तक इन सड़कों पर सफेद पट्टी बनवाना जरूरी नहीं समझा। ऐसे में कोहरा छाने के बाद रात में ये काली सड़कें हादसे के बाद खून से लाल हो रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार आंखें मूंदे हुए हैं।
यह हालात भी तब हैं, जब 28 अक्तूबर को लघु सचिवालय में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में खुद उपायुक्त उत्तम सिंह संबंधित विभागों से समय रहते सफेद पट्टी लगवाने के निर्देश जारी कर चुके हैं। 20 दिन बीतने के बाद भी सड़कों पर पट्टी लगवाना तो दूर अधिकारियों ने इसके लिए प्रयास भी शुरू नहीं किया। सामान्यत: 15 नवंबर के बाद सड़कों पर कोहरा छाता है। लेकिन इस बार सर्दी का आगमन जल्दी होने के कारण 10 नवंबर से ही रात और अल सुबह कोहरा छाया रहता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग तो दूर शहर की सड़कों को भी रोड इंजीनियरिंग से जुड़े विभागों के अधिकारी दुरुस्त नहीं कर पाए। धुंध में लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मजबूरन खतरे भरा सफर तय कर रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को स्थिति देखी तो राष्ट्रीय राजमार्ग, तीन राजमार्ग, शहर से बाहर जाने और आने वाले रास्तों समेत 25 प्रमुख मार्गों से सफेद पट्टी गायब थी। ज्यादातर जगहों पर पिछले साल बनी पट्टी मिट चुकी है जो रात में दिखाई नहीं पड़ती। इसके अलावा कई जगह उखड़ी सड़कों से भी राहगीर हादसों का शिकार हो रहे हैं।
70 किमी के हाईवे पर कई जगह हालात खराब
नेशनल हाईवे पर कुरुक्षेत्र सीमा से लेकर पानीपत तक 70 किलोमीटर में सर्विस लाइन पर कुछ जगहों को छोड़कर कहीं भी सफेद पट्टी नहीं है। इसके अलावा एलिवेटेड हाईवे पर भी कई जगहों से रोड मार्किंग गायब है। दिल्ली से अमृतसर तक जाने के लिए 24 घंटे में 80 हजार से ज्यादा वाहन इस हाईवे से गुजरते हैं। रोजाना औसतन दो हादसे होते हैं, फिर भी एनएचएआई लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं है।
इसलिए जरूरी सफेद पट्टी-
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप राणा व तेजपाल का कहना है कि सड़कों पर रोड मार्किंग होना बेहद जरूरी है। धुंध के सीजन में दृश्यता शून्य हो जाती है। ऐसे में सफेद पट्टी और रिफ्लेक्टिव कैटआइज ही चालक को रास्ता दिखाने में मददगार होती है। उनका कहना है कि सफेद पट्टी से 10 मीटर तक का रास्ता साफ दिखाई देता है। हाईवे के अलावा शहर की सड़कों पर भी सफेद पट्टी जरूरी है। क्योंकि काफी लोग रात में अपनी दुकानें बंद करके या कार्यालयों से घर जाते हैं।
इन सड़कों पर नहीं सफेद पट्टी
- काछवा रोड
- काछवा रेलवे ओवरब्रिज
- कैथल राजमार्ग नहर पुल
- कैथल रोड पुल से नहर पुल तक
- रेलवे रोड
- रामगढ़िया मार्ग
- पुरानी सब्जी मंडी से परशुराम चौक
- सेक्टर-12 रोड अस्पताल चौक
- आईटीआई चौक से एनडीआरआई चौक
- लघु सचिवालय से आईटीआई चौक रोड तक
इन सड़कों पर फीकी हो चुकी सफेद पट्टी
- एनडीआरआई से बलड़ी चौक
- माल रोड
- पश्चिमी बाईपास
- करनाल से काछवा गांव तक
- कैथल राजमार्ग पर करनाल से चिड़ाव मोड़ तक
- राष्ट्रीय राजमार्ग नमस्ते चौक से कर्ण लेक तक
- करनाल से कुंजपुरा गांव तक
- इंद्री राजमार्ग पर
- सेक्टर-9 मार्ग पर
वर्जन-
सड़कों के गड्ढे भरने को लेकर और सफेद पट्टी बनाने को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। जल्द इसे लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट भी मांगी जाएंगी। लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
- उत्तम सिंह, उपायुक्त
-आगे क्या-
22 नवंबर तक और गिरेगा पारा
करनाल। पिछले एक सप्ताह से न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट हो रही है। शनिवार को भी न्यूनतम तापमान दो डिग्री कम दर्ज किया गया है। शनिवार को अधिकतम 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 22 नवंबर तक ठंड और बढ़ेगी। वहीं अगले कुछ दिनों में कोहरा छाने की उम्मीद है। ऐसे में सड़कों की बदहाल हालत के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। न्यूनतम तापमान 11 डिग्री तक आने की उम्मीद है।