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जब मन अशांत हो तीन मिनट तक करें गीता पाठ, मिलेगी शांति :स्वामी ज्ञानानंद

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करनाल। श्री कृष्ण कृपा जीओ गीता परिवार की ओर से सेक्टर 12 के हुडा मैदान में दिव्य गीता सत्संग में प्रवचन करते हुए गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि जब मन अशांत हो, किसी बात को लेकर दुविधा हो, तनाव और मानसिक दबाव हो, तो तीन मिनट का श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करें। मन जरूर शांत होगा।
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गीता मनीषी ने कहा कि शुभ कार्य में प्रवेश करने से पहले, किसी यात्रा पर जाने से पहले पाठ करेंगे तो निश्चित तौर पर भगवान की कृपा होगी। अद्भुत प्रभाव पड़ेगा और आनंद ही आनंद होगा। गीता अपने आप में समूचे विश्व का एक वंदनीय और प्रेरणाप्रद ग्रंथ है। सभी ग्रंथों का सार गीता है, लेकिन साथ में मानवता का आधार भी गीता है। यह सत्य है कि गीता हमारी सनातन आस्था है, हमारी श्रद्धा है, लेकिन यह भी सत्य है कि गीता हिंदुओं की आस्था होते हुए भी केवल हिंदुओं के लिए नहीं है। गीता का प्रत्येक शब्द प्रत्येक भाव समूची मानवता के लिए है। भारत का गौरव है गीता इसमें कोई संदेह नहीं है। यह सत्य है कि गीता केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए है।
गीता का उपदेश आज से 5162 वर्ष पूर्व दिया गया था। इसका कारण यह है कि गीता में केवल कथा नहीं है, केवल उपदेश भी नहीं है। इसमें जीवन की बात है, जीवन को सही ढंग से जीने की बात है।गीता का अध्ययन करने वाला हठधर्मी नहीं होता। श्रीमद्भागवत गीता में वो प्रेरणाएं है, जिन्हें पढ़कर कोई यह नहीं कहा सकता कि यह ग्रंथ किसी विशेष वर्ग धर्म या समाज के लिए हैं। जो ऐसी बातें करता है उस व्यक्ति ने निश्चित तौर पर गीता का पाठ नहीं किया होगा। गीता पढ़ने वाला मनुष्य कभी संकीर्ण नहीं होगा। वह निष्ठावान हो सकता है, लेकिन हठधर्मी नहीं होगा। गीता शांति के लिए है, अपने सदगुण जगाने के लिए है और अपने भीतर की क्षमताओं को विकसित करने के लिए है। गीता कोई प्रश्न नहीं है गीता जीवन के आनंद के लिए है। यह केवल मात्र भ्रम ही है कि महाभारत ग्रंथ को घर नहीं रखना चाहिए या महाभारत पढ़ने से घर में कलेश होते हैं। बल्कि महाभारत ग्रंथ हमारी परंपराओं की अद्भुत पूंजी है। इसमें जीवन के लिए प्रेरणाएं हैं और साथ ही चेतावनियां भी हैं। सन्मार्ग पर ले जाने के लिए महाभारत ग्रंथ का अध्ययन करें।
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इस मौके पर मेयर रेणु बाला गुप्ता, बृज गुप्ता, भारत भूषण, पंकज गोयल, भूषण गोयल, नरेंद्र बाली, अक्षत गुप्ता, दिनेश जिंदल, सुभाष कांबोज, राजकुमार गोयल, डॉ मनोज गुप्ता, राजेश अग्घी, त्रिलोचन सिंह मौजूद रहे।
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