सीमा विवाद को लेकर बात करते अधिकारी स्वयं
घरौंडा। यमुना नदी के पुल के साथ लगते एक रास्ते को लेकर हरियाणा व उत्तर प्रदेश के प्रशासन के मंगलवार को फिर विवाद हुआ। इधर करनाल और उधर से झिंझाना के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच करीब 3 घंटे तक वार्ता चली। इसके बाद यह सहमति बनी कि सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त निशानदेही कराई जाएगी।
हुआ यूं कि मंगलवार को करनाल प्रशासन की ओर से एक बार फिर यमुना नदी में पिलर लगाने का प्रयास किया गया। जिसकी सूचना पर उत्तर प्रदेश की तरफ से अधिकारी पहुंच गए। लेकिन बैठक में इस बार भी सहमति नहीं बन पाई। तीन दिन पहले भी विवाद हो गया था। पुल के साथ लगते जिस रास्ते को लेकर विवाद है, यहां उत्तर प्रदेश के रेत खनन ठेकेदार आवाजाही करते हैं। हरियाणा की तरफ से अधिकारियों का कहना है कि यह रास्ता हरियाणा में पड़ता है लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन का कहना कि है उत्तर प्रदेश की सीमा के अंदर पड़ता है।
मंगलवार को हरियाणा प्रशासन की ओर से डीएसपी मनोज कुमार, तहसीलदार अरविंद यादव, करनाल निरीक्षक गौरव कुमार आदि पिलर लगाने के लिए पहुंचे थे। सूचना पर यूपी प्रशासन की ओर से एसडीएम झिंझाना, एसएचओ झिंझाना निरीक्षक वीरेंद्र कसाना दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों राज्यों के प्रशासन के बीच कई घंटे तक बातचीत चलती रही।