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Karnal News: कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जब छोड़ दे...

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सुषमा म्यूजिक अकादमी में मनाया गया विश्व संगीत दिवस, पुराने गीत गाकर बांधा समां
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। विश्व संगीत दिवस पर शनिवार की रात सुषमा म्यूजिक अकादमी करनाल में विशेष कार्यक्रम में संगीत की महत्ता पर प्रकाश डाला। केक काटने के बाद संगीत के साथ फिल्मी गीतों को अपनी आवाज देकर प्रस्तुतियां दीं। प्रमुख संगीतकारों को याद किया गया है। इसमें प्रो. जोगेंद्र मदान ने महफिल का आगाज इस गीत से किया-कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे, तब तुम मेरे पास आना प्रिये मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए।
पुरानी तहसील मार्केट के पास सुषमा म्यूजिक अकादमी में आयोजित विश्व संगीत दिवस कार्यक्रम में संगीत से जुड़े उद्यमियों, साहित्यकारों व संगीत प्रेमियों ने सबसे पहले केक काटकर एक दूसरे को बधाई दी। इसमें उद्यमी एवं संगीत प्रेमी राज बजाज ने संगीत को ईश्वर की वाणी बताते हुए कहा कि जहां संगीत होता है, वहीं पर खुशी होती है।
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प्रो.जोगेंद्र मदान ने कहा कि संगीत दुनिया की सर्वोत्तम दवा है। जो बड़े बड़े रोग मे आराम पहुंचाती है, क्योंकि ये सीधे तौर पर दिल की खुशी और सुकून से जुड़ा है। मानसिक थकान से चूर व्यक्ति संगीत सुनने के बाद खुद को तरोताजा महसूस करता है। अकादमी की निदेशक सुषमा मक्कड़ ने हर व्यक्ति को अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ समय संगीत के लिए अवश्य निकालना चाहिए। इसके बाद साजोआवाज के बीच गीतों की प्रस्तुति दी गई। सुषमा मक्कड़ व राजीव मल्होत्रा ने गाया- आ जा आजा रे, तुझको मेरा प्यार पुकारे...। नरेश अरोड़ा बोले-चांद सी महबूबा हो मेरी, कम ऐसा मैने सोचा था...।
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योगेश शर्मा ने सुनाया-सुख के सब साथी, दुख में न कोय। मेरे राम तेरा नाम एक सच्चा, दूजा न कोय। उत्तम पाल गुलाटी ने तराना छेड़ा-छेड़ा मेरे दिन में तराना तेरे प्यार का...। प्रेम गांधी ने - अकेले हैं चले आओ जहां हो, कहां आवाज दे तुमको कहां हो...। जवाहर लाल नागपाल ने गीत सुनाया-न झटको जुल्फ से पानी, ये मोती फूट जाएंगे...। रोहित अग्रवाल ने गीत सुनाया-नीले गगन तले, धरती का प्यार पले...।
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