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Karnal News: अगर सांप डस जाए तो अस्पताल जाएं आप

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- जिले में एक माह में पांच लोगों की सर्पदंश से हो चुकी मौत, 17 की जिला नागरिक अस्पताल में एंटी वेनम से बची जान
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- जिले में मिलती हैं 13 प्रजातियां, इनमें चार जहरीले
- कॉमन क्रेट के डसने का पता नहीं चलता, रात को बेड पर चढ़कर लेता है सोए व्यक्ति की जान

जगदीप
करनाल। गर्मी के साथ उमस बढ़ने से जिले में सर्पदंश की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। एक माह में सांप के डसने से जहां पांच लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं समय पर इलाज मिलने से 17 लोगों की जान बचाई जा सकी है। विशेषज्ञ का कहना है कि यदि सांप डस ले तो समय रहते अस्पताल पहुंचने और सही उपचार लेने से जान बच सकती है।
जिला नागरिक अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम दवा भी उपलब्ध है लेकिन कुछ लोग आज भी दवा के बजाय झाड़-फूंक और अंधविश्वास के फेर में फंसकर अपनी जान गंवा बैठते हैं। सर्पदंश की वजह से जिन लोगों की जानें गई हैं उनमें से कई के परिजनों में जागरूकता का अभाव देखा गया है। जो लोगों की जान ले लेता है। जिले में रोजाना 1-2 कोबरा, 4-5 कॉमन क्रेट पकड़े जाते हैं। रसेल वाइपर पूरे सीजन में 4-5 मिलते हैं। - संवाद
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जिले में सांपों की 13 प्रमुख प्रजातियां-

जिले में सांपों की करीब 13 प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से तीन– कोबरा, किंग कोबरा, कॉमन क्रेट और रसेल वाइपर बेहद जहरीली माने जाते हैं और इनके डसने से जान जाने का खतरा रहता है।
कोबरा : इसे काला नाग भी कहा जाता है। यह अप्रैल, मई और अक्तूबर-नवंबर में ज्यादा सक्रिय होता है। ये सुबह शाम ज्यादा निकलता है। घर में स्टोर, रसोई, अलमारी के नीचे व पूजा घर में छिपा मिलता है।
किंग कोबरा : ये थोड़ा भारी होता है। इसके फन पर त्रिशूल जैसा निशान होता है। इसकी पहचान लगभग कोबरा जैसी होती है लेकिन ये देखने में डरावना होता है।
कॉमन क्रेट : इसे साइलेंट किलर भी कहते हैं। यह रात के समय बाहर निकलता है और जून से अक्तूबर तक सक्रिय रहता है। ये चारपाई और बेड पर सोए व्यक्ति को ऊपर चढ़कर कान के पीछे काटता है। ये हमेशा सीधा रेंगता है। इसके डसने का दर्द नहीं होता। ऐसा लगता है मानो किसी मच्छर ने काटा हो। कई मामलों में इसके डसने के बाद नींद में व्यक्ति की मौत हो जाती है। ये पतला और लंबा होता है। काले रंग के साथ सफेद गोले बने होते हैं।
रसेल वाइपर : दिखने में अजगर जैसा होता है लेकिन आकार छोटा होता है, मुंह पतला और शरीर पीछे से मोटा होता है। यह सर्दियों में ज्यादा दिखता है। ये रेंगते समय एस का आकार बनाता है।



जिले में कहां-कहां मिलते हैं सांप-



गंगाटेहड़ी गांव, असंध : यहां सबसे ज्यादा कॉमन क्रेट मिलते हैं।

मूनक खंड के गांव : रसेल वाइपर अधिक पाए जाते हैं।
फैक्टरी एरिया, करनाल : कोबरा सांप ज्यादा मिलते हैं।


कुछ सांप जहरीले नहीं होते



जिले में पाए जाने वाले अन्य सांपों में वाटर स्नैक, कॉमन सैंड बोआ (दो मुंह वाला), वूल्फ स्नैक, ब्लाइंड स्नैक, बेंडेंड कूकरी और हुरवा जैसे सांप शामिल हैं। ये सांप जहरीले नहीं होते और इनके काटने से जान को खतरा नहीं होता। खास बात यह है कि रेट स्नैक या घोड़ापछाड़ भी जिले में मिलता है, जो जहरीला नहीं होता और किसानों का मित्र माना जाता है।



सर्पदंश से ऐसे करें बचाव

- घर में साफ-सफाई रखें, दरवाजा फर्श से मिला हो और फर्श या दीवारों में सुराख न हो।
- किसी कोने में सामान इकट्ठा न करें, जिससे सांप छिप न सके।

- अगर घर में सांप घुस जाए तो डरें नहीं, बाहर न भागें।
- अगर सांप छिप जाए तो दरवाजे के पास आटे से लाइन बनाएं, जिससे गुजरने पर निशान मिल सकें।

- अंधेरे में टॉर्च लेकर चलें, स्टोर को साफ रखें, यहां मेढक और चूहे न होंने दें।








सांप के डसने पर यह करें-


- मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाएं, जिला अस्पताल में एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध है।

- डसने की जगह को नीचे रखें, ताकि ज़हर दिल तक न पहुंचे।
- मरीज को शांत रखें और हिलने-डुलने न दें।
- सांप की पहचान संभव हो तो कर लें या उसकी फोटो लें।




ये गलती न करें
- झाड़-फूंक या देसी इलाज में समय न गंवाएं।
- जहर को चूसने की कोशिश न करें।
- डसने की जगह पर ब्लेड या चीरा न लगाएं।
- टाइट कपड़े या रस्सी से अंग को कस कर न बांधें।





सांपों के बाहर निकलने का मौसम चल रहा है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। खेतों, नमी वाले इलाकों और झाड़ियों में काम करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर सांप डस ले तो बिना देरी किए अस्पताल जाएं तभी जान बच सकती है।
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- सतीश फफड़ाना, स्नैक मैन


अस्पताल में जहरीले सांपों के डसने पर इलाज के लिए एंटी वेनम दवा उपलब्ध है। अगर सांप काट जाए तो उसकी पहचान अवश्य बताएं, ताकि उसी के अनुरूप दवा देकर जान बचाई जा सके।
डॉ. दीपक, फाॅरेंसिक एक्सपर्ट जिला नागरिक अस्पताल

अगर सांप डस ले तो घबराएं नहीं। शांत मन और दिमाग का इस्तेमाल कर सीधे अस्पताल जाएं ताकि समय पर मरीज की जान बचाई जा सके। झाड़फूंक के चक्कर में न आएं।
राजबीर सिंह, निरीक्षक वन्य जीव विभाग
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