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Karnal News: मंडियों में गेहूं की आवक शुरू खरीदारी के साथ उठान भी धीमा

Fri, 03 Apr 2026 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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37 कैथल में नई अनाज मंडी में सुखने के लिए फैलाई गई गेहूं    संवाद 
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। मंडियों में गेहूं की आवक तो हो रही है लेकिन खरीद व उठान धीमा है। मंडियों में अभी तक पूरा बारदाना नहीं पहुंच पाया है, जिससे खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। वीरवार को जिले की सात मंडियों में करीब 700 क्विंटल गेहूं की आवक हुई लेकिन खरीद 500 क्विंटल की ही हो पाई। 12 प्रतिशत से ज्यादा नमी होने से फसल नहीं बिक पाई।

उधर, ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट अनिवार्य किए जाने और बॉयोमीट्रिक प्रक्रिया लागू होने से भी किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि इन औपचारिकताओं के चलते उन्हें मंडी में अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द मंडियों में पर्याप्त बारदाना उपलब्ध करवाया जाए और बॉयोमीट्रिक व अन्य प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएं, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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आवक सीमित, खरीद धीमी : जिले की मंडियों में वीरवार को करीब 700 क्विंटल गेहूं पहुंचा जबकि गुहला मंडी में केवल एक ढेरी ही पहुंची। कम आवक के साथ-साथ खरीद व्यवस्थाओं की कमी के कारण गेहूं की खरीद रफ्तार भी धीमी बनी हुई है।
चीका मंडी में नमी के कारण नहीं हुई गेहूं की खरीद
गुहला-चीका। एशिया की प्रमुख अनाज मंडी चीका में गेहूं की आवक बुधवार से शुरू हो गई है लेकिन गेहूं खरीदने के लिए पहुंचे खरीदार नमी का मात्रा अधिक होने के कारण गेहूं नहीं खरीद रहे हैं।

चीका अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान कर्मचंद गर्ग ने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी फसल को सुखाकर ही मंडी में लेकर आए। वीरवार को दुसेरपुर गांव का किसान सुभाष चंद गेहूं की फसल को लेकर अनाज मंडी में पहुंचा, जहां पर मार्केट कमेटी के कर्मचारियों ने सत्यापन के उपरांत गेट पास काटा।

बुधवार से अनाज मंडियों में गेहूं खरीद का कार्य शुरू कर दिया गया था। वीरवार को भी चीका मंडी में एक किसान गेहूं लेकर आया लेकिन नमी की मात्रा अधिक होने के कारण गेहूं को खरीदा नहीं जा सका। किसान भाई गेहूं को अच्छी तरह से सुखाकर ही मंडी में लेकर आएं। - सतबीर राविश, सचिव मार्केट कमेटी चीका।

सरसों की सरकारी खरीद कम, प्राइवेट ज्यादा
चार मंडियों में वीरवार को करीब 400 क्विंटल सरसों की आवक हुई, जिसमें सरकारी खरीद कम और प्राइवेट खरीद ज्यादा रही। इसका मुख्य कारण प्राइवेट व्यापारियों की ओर से अधिक रेट दिया जाना है। जहां सरकारी रेट 6200 रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं प्राइवेट में 6300 से 6400 रुपये तक दाम मिल रहे हैं।
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सरसों का एक एकड़ में 10 क्विंटल तक उत्पादन

किसानों के अनुसार, इस बार सरसों की पैदावार भी अच्छी रही है। एक एकड़ में करीब 10 क्विंटल तक उत्पादन निकल रहा है, जिससे किसानों को इस बार आर्थिक लाभ की उम्मीद है।
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