करनाल में मौसम ने एक बार फिर से करवट ली है। दिनभर आसमान में बादल छाए रहने के बाद शाम को बूंदाबांदी हुई। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। पिछली बरसात से खेतों बिछौना बनी गेहूं की फसल पर अब बरसात की एक बूंद भी नुकसान का सबब बन सकती है। वहीं बुधवार को शाम से ही आसमान में बादल उमड़ने लगे थे।
वीरवार को सुबह की शुरुआत घनघोर घटाओं के साथ हुई। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे, वहीं कई जगह पर शाम के समय हल्की बूंदाबांदी भी हुई है। वहीं, मौसम विभाग की माने तो अगले 24 घंटों तक आसमान में बादल छाए रहेंगे तथा जिले में कई जगह पर बूंदाबांदी व गरज के साथ बरसात के भी आसार हैं।
पिछले सप्ताह तीन दिनों तक तेज हवाओं के साथ हुई बरसात से जिले के ज्यादातर हिस्सों में गेहूं की फसल बिछ गई है। यदि बरसात हुई तो उस गिरी हुई फसल को भारी नुकसान हो सकता है। यही नहीं इससे खड़ी फसल के भी गिरने का खतरा है। आसमान में बादल छाए रहने से शहर का तापमान में भी भारी गिरावट आई है। शहर का अधिकतम तापमान 31 डिग्री से 26.2 डिग्री तक पहुंच गया है।
वहीं, न्यूनतम तापमान भी करीब तीन डिग्री तक कम होकर 12 पर पहुंच गया है। इससे लोगों को ठंडक का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग के प्रवक्ता श्याम सिंह ने बताया कि अगले 24 घंटों तक प्रदेश में आंशिक बादल छाए रहेंगे तथा कहीं कहीं पर गरज के साथ बारिश होने की भी संभावना है।
खेतों से निकालें पानी : डॉ. अनिल
गेहूं अनुसंधान संस्थान के कृषि विशेषज्ञ डॉ. अनिल खिप्पल ने किसानों को सलाह दी है कि वे गेहूं की फसल को न तो पानी दें और अगर खेत में पानी जमा है तो उसे निकालें। उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल उन्हीं खेतों में गिरी हैं, जहां पर पानी जमा हुआ है। इसके अलावा, जिन खेतों में जीरो जुताई से गेहूं का बिजान हुआ है, उन खेतों में गेहूं की फसल नहीं गिरी है।
इसका कारण यह है कि जुताई न होने पर मिट्टी की जन सोखने की क्षमता बढ़ जाती है। इसलिए किसानों को खेतों से पानी की निकासी पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा, किसान खेतों की कंप्यूटर लेवलिंग करवाने के बाद ही फसलों का बिजान करेंगे। अब प्रदेश में एक बार फिर बरसात के आसार बन रहे हैं। किसान बारिश होते ही खेतों से पानी को निकालने का प्रयास करें।