एनडीआरआई के जिन अधिकारियों के कार्यालयों में चंद दिनों पहले चहल पहल और गहमागहमी होती थी, वे कार्यालय अब वीरान पड़े हैं। अधिकारी सीट पर नहीं मिल रहे। इतना नहीं पिछले तीन दिनों से अधिकारियों के कार्यालयों पर ताले पड़े हुए हैं। वहीं, संस्थान का कोई भी अधिकारी गबन के मामले में मुंह खोलने को तैयार नहीं है। गबन मामले की जांच में अधिकारियों की सांसें फूली हुई हैं और उनमें हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। उधर, सीआईए टीम ने संस्थान के एक वैज्ञानिक से पूरे मामले में कई घंटे तक पूछताछ की है।
गुुरुवार को अमर उजाला टीम ने एनडीआरआई संस्थान का दौरा किया। इस दौरान न तो निदेशक अपने कार्यालय में मिले और न ही निकरा प्रोजेक्ट के इंचार्ज डॉ. एसवी सिंह भी सीट पर मौजूद थे। इसके अलावा संस्थान की विजिलेंस आफिसर डॉ. स्मिता सिरोही के कार्यालय पर ताला जड़ा था। संस्थान में यह स्थिति पिछले कई दिनों से बनी हुई है। एक दिन पहले बुधवार को भी संस्थान का दौरा किया गया तो अधिकारी नहीं मिले।
अहम बात यह भी है कि संस्थान का छोटे से लेकर कोई भी बड़ा अधिकारी गबन मामले में अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि इस मामले में आईसीएआर के डीजी ने कड़ा संज्ञान लिया है और संस्थान के अधिकारियों से रिपोर्ट भी तलब की है। आला अधिकारियों को रिपोर्ट और पूरे मामले में अपने अपने स्पष्टीकरण देने के लिए अधिकारी दिल्ली हेडक्वार्टर के चक्कर लगा रहे हैं। इस बारे में जब संस्थान के अधिकारियों को फोन किए गए तो उनके नंबर बंद मिले तो कुछ ने कुछ भी टिप्पणी करने से मना कर दिया। संस्थान का कोई भी अधिकारी मीडिया से भी नहीं मिल रहा है और दूरी बनाई हुई है।
कोई मिलने पहुंचे, तो चौंक जाता है स्टाफ
गबन मामले का खुलासा होने के बाद संस्थान के कर्मचारी भी सहमे हुए हैं और कोई भी अनजान व्यक्ति संस्थान में जाता है तो उसे देखकर कर्मचारी भी चौंक पड़ते हैं कि कहीं जांच टीम के सदस्य तो नहीं आ गए? अमर उजाला संवाददाता जब निदेशक कार्यालय पहुंचा तो स्टाफ ने एकदम से सवाल दाग दिए कहां से और क्यों आए हो? निदेशक के बारे में पूछने पर स्टाफ ने कोई भी जवाब नहीं दिया। सकपकाए कर्मचारियों ने कहा कि वे कुछ नहीं जानते?
संस्थान की रिपोर्ट पर विश्वास नहीं कर पा रही पुलिस
एनडीआरआई की विजिलेंस जांच अधिकारी डॉ. स्मिता सिरोही ने हेडर्क्वाटर को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पांच आरोपियों ने ही गबन किया है। इन्होंने अपनी जांच में अन्य पूरे स्टाफ को क्लीन चिट दी है। लेकिन पुलिस जांच अधिकारियों को यह जांच गले से नीचे नहीं उतर रही है। हर किसी का सवाल है कि आखिर इतने बड़े संस्थान से कांट्रेक्ट पर लगे कर्मचारी गबन नहीं कर सकते? सवाल यह है कि आखिर किसकी शह पर इतना बड़ा गबन हुआ?
सीआईए ने की वैज्ञानिक से पूछताछ
सीआईए वन ने मामले की तह तक जाने के लिए एनडीआरआई के वैज्ञानिक से पूछताछ की है। पूछताछ में पूरा प्रोजेक्ट और किस प्रकार से पैसे निकाले जाते रहे हैं, के बारे में जानकारी हासिल की गई है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस पूरे मामले का खुलासा करना चाहती है कि आखिर कैसे यह ठगी की गई और कहीं और कोई इसमें शामिल तो नहीं है। उधर, इस बारे में सीआईए वन के इंचार्ज दीपक कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता के साथ जांच की जा रही है। जल्द ही मामले का पटाक्षेप किया जाएगा।
गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी
सिविल लाइन में केस दर्ज करने के बाद अब सीआईए वन टीम भी आरोपी सुखविंद्र सिंह वासी गांधी नगर, छात्रा मनप्रीत कौर वासी नवांशहर, विक्रम वासी गांधीनगर, अमरेंद्र श्रीवास्तव वासी माडल टाउन, दीपक वासी एनडीआरआई कैंपस को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। गुरुवार को भी कई स्थानों पर दबिशें दी गई। उधर, बताया जाता कि सीआईए ने संस्थान के अकाउंट से संबंधित दस्तावेज लिए हैं, ताकि पूरा रिकार्ड खंगाला जा सके।