करनाल। साइबर अपराधी लोगों से ठगी करने के लिए हर रोज नया पैंतरा अपना रहे हैं। साइबर अपराधी वरिष्ठ नागरिकों को ठगी के लिए आसानी से निशाना बना रहे हैं। खासकर डिजिटल अरेस्ट करके आर्थिक रूप से समृद्ध बुजुर्गों के साथ ठगी हो रही है। लोगों को डराने के लिए फर्जी एफआईआर से लेकर पुलिस थाना और कोर्ट तक बना लेते हैं। लगातार तीन-चार दिन डिजिटल अरेस्ट कर खाते से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। सारा खेल थाइलैंड, कंबोडिया और दुबई से चलता है।
सबसे पहले बुजुर्गों को उनके आधार कार्ड से फर्जी खाता खुला होने और आधार कार्ड पर ज्यादा संख्या में सिम कार्ड रजिस्टर होने की बात कहकर फंसाया जाता है। बुजुर्गों को डर दिखाया जाता है। लगातार उनके साथ व्हाट्सएप पर बने रहने के लिए बाध्य किया जाता है और किसी को बताने पर तुरंत गिरफ्तारी या फिर बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाती है। ऐसा होने पर बुजुर्ग किसी को जानकारी नहीं दे पाते। बुजुर्गों में डर पैदा हो जाने के कारण वह अपराधियों के कहने पर चलते हैं। ये खेल हो जाने के बाद ठग उनके खाते की पूरी जानकारी ले लेते हैं।
बाद में वर्चुअल फर्जी कोर्ट दिखाकर उनसे केस निपटान के नाम पर जज लाखों रुपये मांगते हैं। जब यह पैसा ठगों के बताए खाते में भेज दिया जाता है तो परिवार को पता लगता है। इसके बाद पुलिस को शिकायत की जाती है। इस साल में करनाल में डिजिटल अरेस्ट के दो मामले सामने आए हैं। पहले मामले में पुलिस आठ आरोपी गिरफ्तार कर चुकी है और 25 लाख रुपये की रिकवरी हुई है।
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केस-1
रिटायर्ड बैंक मैनेजर से ठगे 65 लाख
मार्च माह में साइबर थाना पुलिस को एक बैंक से रिटायर्ड मैनेजर ने शिकायत दी थी कि उसके पास व्हाट्सएप कॉल आई। उसे बताया कि उसके आधार कार्ड पर 38 मोबाइल सिम चालू है। उनके नाम की सिम नशीले पदार्थ के तस्कर प्रयोग कर रहे हैं। कई नंबर अन्य आपराधिक कार्यों में प्रयोग हो रहे हैं। वीडियो कॉल के माध्यम से पहले पुलिस थाने और उसके बाद वर्चुअल कोर्ट में पेशी कराई गई। कहा गया कि उनके घर के आसपास भी उनकी टीम है, जो कोर्ट में ऑर्डर दिया जाए वैसा करना है। वरना उनकी टीम उन्हें गिरफ्तार कर लेगी। अंत में बैंक खातों की डिटेल ले ली गई। 65 लाख रुपये खाते से ट्रांसफर करवा लिए। मामले में पुलिस ने आठ आरोपी गिरफ्तार करके 25 लाख रुपये की रिकवरी की थी। जांच में पता चला कि सारा खेल कंबोडिया और थाइलैंड से हुआ था।
सतर्कता ही बचाव
1. अज्ञात स्रोतों से बचें : अज्ञात ईमेल, फोन कॉल या टेक्स्ट संदेशों के प्रति सतर्क रहें।
2. व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें : संवेदनशील व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी को कभी भी किसी के साथ साझा न करें
3. सत्यापन करें : यदि कोई परिवार के सदस्य या कोई प्राधिकरण की ओर से तत्काल मदद या वित्तीय सहायता मांग की जाए तो उनकी पहचान की पुष्टि करें।
4. मजबूत पासवर्ड और टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें, जिससे ऑनलाइन खातों तक पहुंच रोकी जा सके।
5. किसी भी अनजान लिंक, अटैचमेंट या कॉल से सीधे निजी जानकारी (ओटीपी, बैंक डिटेल्स, पासवर्ड) साझा नहीं करें।
6. साइबर अपराध की किसी भी संदिग्ध घटना की हेल्पलाइन 1930 या ऑनलाइन पोर्टल cybercrime.gov.in के माध्यम से शिकायत दर्ज करें।
7. कभी भी फोन के माध्यम से पुलिस थाना या कोर्ट में पेशी नहीं होती है, इसलिए सावधान रहें।
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डिजिटल अरेस्ट कुछ भी नहीं होता है। पुलिस कभी भी ऐसी प्रक्रिया नहीं करती। अगर किसी के पास इस संदर्भ में कोई कॉल आए तो कॉल को तुरंत काट दें और इसकी जानकारी पुलिस को दें। ताकि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जा सके। -गंगाराम पूनियां, एसपी, करनाल