करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में संस्थान, हरियाणा पुलिस और इंडियन ऑयल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सात दिवसीय प्रकृति उत्सव के समापन समारोह में जहां ‘पर्यावरण और जिंदगी’ विषय बौद्धिक मंथन हुआ। समारोह के दौरान सांस्कृतिक छठा बिखेरने वाले विद्यार्थियों, सहयोगियों को सम्मानित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सेवानिवृत्त आईएएस पीके दास ने आह्वान किया कि हमें ऐसे कार्य करने होंगे, जिनमें प्रकृति को नुकसान न हो।
पीके दास ने कहा कि प्रकृति संरक्षण के लिए जरूरी है कि हम ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें जिस से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उन्होंने बच्चों से जीवन को खुशहाल बनाने के लिए किताबों को पढ़ने की आदत डालने के लिए कहा।
जीबी पंत कृषि एवं प्रोद्याेगिकी विश्वविद्यालय पंत नगर के कुलपति डा. एमएस चैहान ने कहा कि धरती सिर्फ हमारी नहीं है बल्कि इस पर असंख्य जीव जंतुओं का अधिकार है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति की यह जिम्मेदारी है कि वो धरती को खुशहाल बनाए रखने में छोटे-छोटे कदम बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि 1951 में देश की 36 करोड़ आबादी थी, तो अनाज पांच करोड़ टन की पैदा होता था, आज हम 140 करोड़ होने के बाद भी अन्न निर्यात करते हैं लेकिन पैदावार बढ़ाने की होड़ में कहीं न कहीं मिट्टी खराब होने लगी है। करीब 19.30 करोड़ लोग कुपोषण का शिकार है, अब हमें गंभीर होना होगा।
एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने किताबों को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि किताबें मनुष्य की ऐसी दोस्त हैं जो उसके हर सुख दुख में साथ देती है वो कभी अकेला नहीं छोड़ती। संयोजन में डाॅ. एके सिंह, डाॅ. राजन शर्मा, डाॅ. जय कौशिक, डाॅ. एके डांग, डाॅ. गुंजन, डाॅ. शुभाशीष मंडल, डॉ. गोपाल सांखला, डाॅ. बीएस मीणा के योगदान के लिए उन्हें किताबें भेंट कर सम्मानित किया गया। पुलिस पीआरओ आउटरीच राजीव रंजन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। पुस्तक मेले में करीब आठ लाख रुपये की नकद की खरीदारी की।
इन स्कूलों के बच्चों ने दी प्रस्तुति
- दून इंटरनेशनल स्कूल, जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल करनाल, डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल पानीपत, डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल कुरुक्षेत्र की रही। बच्चों व शिक्षकों को किताबें भेंट कर सम्मानित किया गया। महोत्सव के समापन पर रीता राय के निर्देशन में साधना नाटक का मंचन किया गया। इसमें खुशी, परछाई खुशी वर्मा, सास-खूशबू, पति-कार्तिक, पिता-जतिन, गीता मन्नो-वेणू ने सराहनीय भूमिका निभाई।