करनाल। प्रदेशभर के कई जिलों में पानी में विषैले व खतरनाक रसायन मिलने के कारण जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की राज्य लैब में 10 जिलों से पानी के नमूने मंगवाए गए हैं। यहां इन नमूनों की जांच आईसीपीएमएस (इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री) से होगी।
खास बात यह है कि नमूनों में से पानी की कुछ बूंदों की मात्रा से ही उसमें घुले हुए आर्सेनिक, कैडमियम, क्रोमियम, तांबा, सीसा, मैगनीज, पारा, निकल व यूरेनियम जैसे तत्वों का पता लगाया जा सकेगा।
यदि ऐसे पानी का लगातार सेवन किया जाए तो लोगों को त्वचा रोग, कैंसर, पेट और सिर से संबंधित अनेक बीमारियां हो सकती हैं। पहले इस मशीनरी का उपयोग भू-रासायनिक विश्लेषण, धातु विज्ञान, फार्मास्युटिकल विश्लेषण और नैदानिक अनुसंधान के लिए किया जाता था।
आईसीपी-एमएस में पानी के नमूनों की जांच के लिए पानी के सैंपल से मिलीग्राम की मात्रा लेकर पानी के सभी तरह के नमूनों की जांच की जा सकती है। इस कार्य के लिए जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की मोबाइल वैन प्रदेश के सभी जिलों में लगातार सैंपल एकत्रित करने के लिए पहुंच रही है।
इससे पहले जल वितरण प्रणाली में संदूषकों का पता लगाने के लिए स्पेक्ट्रोस्कोपिक तकनीक, बायोसेंसर दृष्टिकोण, इन-सीटू माप, हाथ से पकड़े जाने वाले सेंसिंग उपकरण इस्तेमाल किए जाते थे। इन तकनीकों के माध्यम से जल गुणवत्ता का विश्लेषण नहीं लग पाता था। संवाद