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विरोध जताना अधिकार पर हिंसा नहीं बर्दाश्त

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आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधियों से बातचीत करते उपायुक्त व एसपी।
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करनाल। तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान सत्तारूढ़ नेताओं व मंत्रियों का रास्ता रोककर घेराव और कार्यक्रम नहीं होने देने के मामले में अब प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया है। लघु सचिवालय में शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा पदाधिकारियों संग बैठक कर उपायुक्त ने कहा कि विरोध जताना सभी का अधिकार है पर हिंसा और कार्यक्रमों में खलल कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं भाकियू प्रतिनिधियों ने कहा कि झगड़ा या हिंसा करना किसानों का काम नहीं। वे केवल संयुक्त मोर्चा के बड़े नेताओं के आदेशों का पालन करते हैं। जब तक उनकी मांग नहीं सुनी जाती प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।
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लघु सचिवालय में बैठक के दौरान उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बीते दिनों हिसार, सिरसा व टोहाना में किसानों के प्रदर्शन और वीआईपी दौरों के बीच हिंसात्मक घटनाओं का जिक्र करते कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए थी। किसान कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन और प्रदर्शन कर रहे हैं, अवश्य करें, लेकिन कोई भी वीआईपी, नेता व मंत्री जब जनता के बीच बैठक करने आए तो उसमें खलल डालने या न होने देने की बात करना गलत है, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों की लड़ाई कृषि कानूनों के खिलाफ है, यह व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। जिस पर शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन सभी का अधिकार है, उसी प्रकार जनता के बीच जाना जनप्रतिनिधियों का हक है।
दूसरी ओर बैठक में भाकियू प्रदेश अध्यक्ष सेवा सिंह आर्य, संयुक्त किसान मोर्चा के मास्टर रामकुमार, जगदीप सिंह औलख, रामपाल चहल व जिला प्रधान यशपाल राणा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसान हिंसा और हंगामे का समर्थन नहीं करते। प्रतिनिधिमंडल में शामिल किसान नेताओं ने वीआईपी के कार्यक्रमों का विरोध न करने और रास्ता न रोकने आदि पर कोई स्पष्ट भरोसा नहीं दिया, सिर्फ इतना कहा कि जो संयुक्त किसान मोर्चा का आदेश होगा, किसान वह करेंगे।
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