- जेईई एडवांस में टॉप रैंक पाने वाले छात्रों ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी
- गिफ्ट गैलरी, कबाड़ फैक्टरी और राइस मिल संचालक के बेटे बनेंगे इंजीनियर
गगन तलवार
करनाल। डर के आगे जीत है..। यह बात जेईई एडवांस के परीक्षा परिणाम में शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों ने साबित करके दिखाई है। जेईई की तैयारी में होनहार जिस विषय में कमजोर थे, उसी पर ज्यादा तैयारी की तो यही विषय उनकी सफलता का आधार बना है। कर्ण नगरी के रमित गोयल ने ऑल इंडिया स्तर पर 45वां, रिदम गोयल ने 213 और प्रियम गुप्ता ने 444वां रैंक पाया है।
अमर उजाला से बातचीत में होनहारों ने बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाई। केवल जरूरत पड़ने पर ही मोबाइल फोन को कॉल करने के लिए इस्तेमाल किया। इसी के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में मुकाम पाया। तीनों ही छात्र कैमिस्ट्री या फिजिक्स विषय में कमजोर थे। इसी पर उन्होंने मेहनत की और अब परीक्षा परिणाम में उनके इन्हीं विषयों में सर्वाधिक अंक हैं। खास बात यह है कि तीनों ही विद्यार्थी अपने परिवार से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले पहले विद्यार्थी होंगे। गिफ्ट गैलरी, कबाड़ फैक्टरी और राइस मिल संचालक पिता इनके रोल मॉडल हैं। जिन्हें इन विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय दिया है। उनका कहना है कि पिता की मेहनत से ही वे पढ़ाई कर पाए हैं।
रमित ने डेढ़ साल पहले शुरू की तैयारी
ऑल इंडिया रैंक : 45
विकास कॉलोनी के रहने वाले रमित गोयल का ऑल इंडिया 45वां रैंक है। उसका मुंबई आईआईटी में दाखिला होना लगभग तय है, इसी के लिए उन्होंने डेढ़ साल पहले तैयारी शुरू की थी। छात्र ने बताया कि उन्होंने स्कूल के अलावा निजी संस्थान से कोचिंग भी ली थी। उनके पिता अरविंद गोयल गिफ्ट गैलरी चलाते हैं और मां संध्या गोयल गृहिणी है।
ओपीएस विद्या मंदिर से उन्होंने 12वीं की परीक्षा भी पास की। उन्होंने बताया कि स्कूल में 11वीं की पढ़ाई के दौरान से ही वे तैयारी कर रहे थे। गणित विषय उनका सबसे आसान और पसंदीदा था। जबकि इसी में उनके कम अंक आए और कमजोर विषय कैमिस्ट्री में 120 में से 105 अंक मिले हैं। छात्र ने इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड का मुंबई में 16 दिन का कैंप भी लगाया। छात्र का कहना है कि सफलता के लिए परिवार को सहयोग जरूरी है। परिवार ने उन्हें हमेशा साथ दिया। ज्यादा अंक पाने के लिए उन पर कभी दबाव नहीं बनाया गया।
रिदम ने बदला तैयारी का तरीका
ऑल इंडिया रैंक : 213
सेक्टर-13 निवासी रिदम गोयल ने परीक्षा के प्रारूप के आधार पर तैयारी का तरीका बदला और ऑल इंडिया स्तर पर 213वां रैंक प्राप्त किया। उसने बताया कि मेन्स में तीन घंटे की परीक्षा होती है और एडवांस में छह घंटे की। इसी अनुसार, उन्होंने कई बार छह घंटे की परीक्षा के आधार पर ही प्रश्न पत्र भी हल किए। अपने दादा स्वर्गीय नंदलाल गोयल का सपना पूरा करने के लिए उद्यमी बनना चाहता है। पिता राजेश राइसमिल संचालक हैं और मां अंजू रानी गृहिणी हैं। उनका कहना है कि जेईई की तैयारी में शुरुआत में उन्हें दिक्कत आई थी। इस कारण वे अपने बैच में भी पीछे थे। संस्थान के शिक्षकों ने उन्हें इस बात का एहसास कराया। जिसके बाद उन्होंने दोबारा से मेहनत शुरू की और पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त की। उन्होंने सबसे पहले पाठ्यक्रम को पूरा किया। इसके किसी भी विषय को पढ़ने से नहीं छोड़ा। इसके बाद उन्होंने रिविजन का शेड्यूल बनाया। पूरे दिन में 10 से 12 घंटे पढ़ाई को दिए। दिल्ली आईआईटी में जाने का लक्ष्य है।
प्रियम ने योजना बनाकर की थी पढ़ाई
ऑल इंडिया रैंक : 444
घरौंडा निवासी प्रियम गुप्ता ने ऑल इंडिया 444वां रैंक प्राप्त किया। छात्र ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के लिए कोई घंटे या समय निर्धारित नहीं किया था। केवल विषयों के लिए ही योजना बनाकर तैयारी की। उन्होंने बताया कि विषय को पूरा करने के लिए कभी वे 10 घंटे पढ़ाई करते थे तो कभी-कभी दो घंटे में तैयारी पूरी हो जाती थी। स्क्रैप फैक्टरी संचालक पिता मुकेश कुमार और आंगनबाड़ी वर्कर मां रजनी गर्ग ने उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। छात्र दिल्ली आईआईटी में दाखिले का सपना है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वह उद्यमी बनना चाहता है। उनका कहना है कि रोजगार देने वाला और देश के विकास में काम करने का उनका लक्ष्य है। उनके परिवार में कोई भी इंजीनियर नहीं है। छात्र का कहना है कि परिवार ने उन्हें पढ़ाई के लिए कभी दबाव नहीं दिया। उन्हें उम्मीद थी तो उसी अनुसार अच्छा परिणाम भी मिला। कम या ज्यादा अंक आने पर उन्हें कभी नहीं टोका गया।