करनाल। वरुथिनी एकादशी व्रत वैशाख मास की कृष्ण की एकादशी 13 अप्रैल को रखा जाएगा। श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, मान्यता है कि इस व्रत को करने से पाप का नाश होता है। सौभाग्य और मोक्ष मिलता है। व्रत पर कई शुभ योग बन रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एकादशी तिथि का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है। शास्त्रों में एकादशी तिथि का यह नियम बताया गया है कि जब भी सूर्योदय के समय एकादशी तिथि लगी होती है तो उस दिन एकादशी तिथि का व्रत किया जाता है।
शास्त्री ने बताया कि वरुथिनी एकादशी तिथि का आरंभ 12 अप्रैल को मध्य रात्रि एक बजकर 17 मिनट पर होगा। तिथि का समापन 13 अप्रैल को रात में एक बजकर 9 मिनट पर होगा। व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा क्योंकि इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि लगी रहेगी।
ये शुभ योगशोभन योग : यह योग शुभ कार्यों, व्रत, पूजा और नई शुरुआत के लिए विशेष होता है।
स्वाति नक्षत्र : यह वायु तत्व प्रधान नक्षत्र है, जो चंद्रमा से जुड़ा होता है। स्वाति नक्षत्र आत्मबल, साधना, और सूक्ष्म ऊर्जा को जागृत करता है।
चंद्रमा तुला राशि में : तुला राशि संतुलन, न्याय और प्रेम की भावना से जुड़ी होती है। जब चंद्रमा यहां होता है तो मानसिक स्थिरता और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति बढ़ती है।