जितेंद्र नरवाल
करनाल। काम शुरू होने के बाद यूनिटी मॉल का बजट बढ़ा दिया गया है। इससे कर्ण नगरी को औद्योगिक नगरी के नाम से भी पहचान मिलने की उम्मीद है। एचएसआईआईडीसी के सेक्टर-37 में प्रस्तावित प्रदेश के एकमात्र यूनिटी मॉल को अब और भी ज्यादा भव्य और सुविधाओं से युक्त बनाया जाएगा। 3.87 एकड़ में तैयार की जा रही इस इमारत का निर्माण ग्रिहा की फॉर स्टॉर तकनीक के आधार पर होगा। इससे इसका बजट अब 162 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
इसमें देश के सभी राज्यों और प्रदेश के सभी जिलों के लिए शोरूम बनाए जाएंगे। ताकि व्यापार के दृष्टिगत सभी प्रदेशों और जिलों को आपस में जोड़ने के लिए एक मंच तैयार हो सके। ओडीओपी यानी वन डिस्टिक्ट वन प्रोडेक्ट योजना के तहत बनाई जानी वाली इस इमारत को ईपीसी मोड पर बेसमेंट के साथ तीन मंजिला बनाया जाएगा। हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने सेक्टर-37 में प्रस्तावित प्रदेश के एकमात्र यूनिटी मॉल का फाइनल डिजाइन तैयार करवा लिया है। जबकि पहले इस प्रोजेक्ट के लिए 121 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।
इसका ठेका एक बिल्डर कंपनी को अलॉट हो चुका है। निर्माण कार्य शुरू ही हुआ था कि ग्रैप की वजह से इसे रोकना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार जुलाई 2027 में इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसे बनाने की जिम्मेदारी एचएसआईआईडीसी को दी गई है लेकिन इसका समन्वयक एमएसएमई विभाग को सौंपा जाएगा।
ये है ग्रिहा-4 तकनीक-
भारत में ग्रिहा 4-स्टार रेटिंग एक उच्च ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ इमारत का प्रतीक है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट डिजाइन और अपशिष्ट कम करने जैसी रणनीतियों के माध्यम से 40 प्रतिशत तक ऊर्जा बचत करती है। इसके अलावा उत्कृष्ट जल प्रबंधन और कम पर्यावरणीय प्रभाव प्राप्त करती है। भारत मंडपम और एआईपीएल जॉय स्ट्रीट जैसी परियोजनाएं इसका उदाहरण हैं। भारत की राष्ट्रीय हरित भवन प्रणाली (एकीकृत आवास मूल्यांकन के लिए हरित रेटिंग) का हिस्सा यह रेटिंग दर्शाती है कि इमारतें आंतरिक और बाहरी वातावरण को एकीकृत करती हैं, जिससे परिचालन लागत और कार्बन फुटप्रिंट प्रभावी रूप से कम होते हैं।
हर जिले को मिलेगा अपने उत्पाद के व्यापार और ब्रांडिंग का मौका
ओडीओपी यानी एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत अब तक देश के 761 जिलों से 1102 उत्पादों की पहचान की जा चुकी है। इस मॉल में अपने उत्पादों को रखकर हर जिला देश भर में इसका व्यापार कर सकेगा। करनाल के इस आधुनिक मॉल में बड़े-बड़े शोरूम बनाए जाएंगे। जहां देश के कई जिलों समेत केंद्र शासित प्रदेशों के विभागों को उनके उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए मंच दिए जाएंगे। सामान्य रूप से इसमें देश के 37 जिलों और केंद्र शासित प्रदेशों और प्रदेश और सरकार के कई विभागों के लिए अलग-अलग 35 बड़े शोरूम तैयार होंगे। इन शोरूम में हर राज्य अपने बेहतरीन जिलों के बेहतरीन उत्पादों की ब्रांडिंग कर पाएगा। यूनिटी मॉल में सुरक्षा से लेकर आधुनिक मूलभूत सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
ऐसे होगा व्यापारिक दृष्टिकोण से काम:
जैसे मेघालय के शिलांग में लाकाडोंग हल्दी को हर जिले तक पहचान दिलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना से आम की किस्मों को संपूर्ण भारत और विदेशों तक पहचान दिलाई जाएगी। जम्मू और कश्मीर के बड़गाम के अखरोट को विदेशों तक प्रचार मिल सकेगा। इसी प्रकार जिस जिले का जो उत्पाद सबसे अच्छा और बेहतर होगा उसकी ब्रांडिंग और व्यवसाय के उद्देश्य से ये मॉल उनको मंच देंगे। जैसे करनाल अपनी कृषि यंत्रों के साथ चावलों की प्रदर्शनी लगा सकेगा। पानीपत अपने टेक्सटाइल से जुड़े उत्पादों क प्रदर्शनी लगा सकेगा।
ये मॉल देश भर में करनाल को एक नई पहचान दिलाने का काम करेगा। ये एक प्रकार का मंच रहेगा जहां देश भर के राज्य और जिले अपने बेहतरीन उत्पादों की प्रदर्शनी लगा व्यापार कर सकेंगे। इस परियोजना पर करीब 162 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई गई है। इसका काम जुलाई 2027 तक पूरा करने का प्लान है।
- गुलशन कुमार, एजीएम, एचएसआईआईडीसी, करनाल