करनाल। प्रदेश सरकार भले ही लाखों खर्च करके राजकीय विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने के दावे कर रही है लेकिन धरातल पर हालात अब भी खराब हैं। करनाल जिले में 110 राजकीय विद्यालय ऐसे हैं जहां कमरे जर्जर हैं। हालांकि कुछ कमरों को पहले गिरा दिया गया था लेकिन इनकी जगह नए कमरों का निर्माण नहीं हो पाया। ऐसे में अब सर्दी और कोहरे के बीच ऐसे विद्यालयों के विद्यार्थी बरामदों में ठंडी हवाओं में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं।
शहरी स्कूलों में तो स्थिति कुछ ठीक है, जबकि ग्रामीण विद्यालयों के हालात ज्यादा खराब हैं। यहां स्कूलों में खिड़कियों की जालियां उखड़ी हैं, कई जगह गत्ते और प्लाई लगाकर हवा को रोकने का प्रयास किया गया है। वहीं 649 राजकीय विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें हॉल या ऐसा बड़ा कमरा नहीं है, जहां पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया जा सके। इन विद्यालयों में खुले में तो कहीं कमरों या बरामदों में प्रार्थना सभा का आयोजन हो रहा है।
इन स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि कमरों की कमी के कारण हालात ज्यादा खराब हैं। पर्याप्त कमरे न होने पर गर्मियों में पेड़ के नीचे तो सर्दियों में बरामदों में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं। अच्छी बात यह है कि जिला टाट-पट्टी से मुक्त है। सभी विद्यालयों में बैंच व ड्यूल डेस्क की संख्या पर्याप्त है। वहीं मिड डे मील की स्थिति की बात करें तो विद्यार्थियों को गर्म आहार तो मिल रहा है लेकिन पीने के लिए उन्हें स्कूल की टंकी का ठंडा पानी ही एकमात्र विकल्प है। जिले में राजकीय विद्यालयों की संख्या 775 है।
मूनक : तीन कक्षाओं के लिए कमरे नहीं, अपग्रेड के बाद भी नहीं शुरू हुई 11वीं-12वीं
राजकीय कन्या उच्च विद्यालय मूनक में सभी सेक्शन मिलाकर 10 कक्षाएं हैं लेकिन इसके भवन में महज सात कमरे हैं। ऐसे में तीन कक्षाएं खुले में पेड़ के नीचे या बरामदे में लगानी पड़ती हैं। ये भी कमरे भी पांच साल पहले जर्जर घोषित हो चुके हैं। इन कमरों में छत की तरफ निगाह दौड़ाएं तो प्लस्तर गिरने के बाद लैंटर के सरिये और दीवारों की मोटी दारारें साफ दिखाई दे रही हैं। जो हर पीरियड के साथ बजने वाली घंटी की तरह खतरे का संकेत हैं। करीब 60 साल पुराना यह स्कूल भवन गांव की गली और मुख्य सड़क से भी चार फुट नीचे है। खास बात यह भी है कि इस स्कूल को प्रदेश सरकार की ओर से 12वीं तक अपग्रेड किया है लेकिन भवन के हालात और कमरों की कमी के कारण आज तक 11वीं और 12वीं की कक्षाएं शुरू नहीं हो पाईं।
सुभरी : टूटी खिड़कियों से निकलते हैं सांप-बिच्छू
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुभरी के 31 साल पुराने भवन की हालत यह है कि हाथ लगते ही दीवारों का प्लस्तर गिर जाता है। स्कूल के साथ कब्रिस्तान है। यहां से सांप और बिच्छू तो कमरों की खिड़कियों की टूटी जाली से सहज ही आ जाते हैं। दो वर्ष में कई बार यहां से स्नेकमैन भी सांप पकड़ चुके हैं। इसके अलावा बरसात और सर्दी के दिनों में स्कूल की प्रार्थना सभा बंद रहती है। क्योंकि कच्चे मैदान में बरसात होने के बाद पानी जमा हो जाता है, जो बाद में कीचड़ का रूप ले लेता है।
मॉडल टाउन : हवा रोकने के लिए बरामदों में लगाई चिक
मॉडल टाउन के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में नए भवन का निर्माण हो रहा है। ऐसे में पुराने भवन के छह कमरों में ही कक्षा छठी से 12वीं तक के 794 विद्यार्थियों की कक्षाएं लगती हैं। जगह के अभाव में बरामदों में भी बैंच लगे हैं। अच्छी बात यह है कि यहां विद्यार्थियों को सर्दी न लगे, इसके लिए बरामदों में चिक आदि लगाई गई है और रोशनी के भी पर्याप्त इंतजाम हैं।
सभी राजकीय विद्यालयों में अभी बरामदों और कमरों में प्रार्थना सभा कराई जा रही है। जिस दिन धुंध या सर्दी कम होती है, उस दिन बाहर आयोजन होता है। कुछ स्कूलों में कमरे कम हैं या जर्जर हैं, उनकी जगह नए बनवाने के लिए प्रक्रिया चली है। जहां ज्यादा स्थिति खराब है, केवल उन्हीं विद्यालयों में पूरे इंतजाम के साथ बरामदों में कक्षाएं लगा रहे हैं।
- रोहताश वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुभरी की दीवार से गिरी सफेदी। फाइन