हरियाणा रोडवेज के वर्कशॉप मैनेजर सुरेश मलिक द्वारा दो कंडक्टरों को सस्पेंड करने के विरोध में शुक्रवार को रोडवेज कर्मचारियों ने चक्का जाम कर दिया। कर्मचारियों ने प्राइवेट बसों को बाहर निकालकर बस स्टैंड के चारों गेटों पर बसें खड़ी कर दीं और आने-जाने का रास्ता रोक दिया। एकजुटता के साथ कर्मचारियों ने जमकर बवाल काटा। मामला बढ़ने पर डीएसपी राजकुमार कौशिक के साथ भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। हालांकि बाद में दोनों कर्मचारियों को बहाल कर दिया गया।
एसडीएम राजीव मेहता के अलावा रोडवेज के जीएम रविंद्र पाठक, टीएम संजय रावल मौजूद रहे। अधिकारियों ने कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। उधर, साढ़े चार घंटे चक्का जाम रहने से सवारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। विरोध जता रहे कर्मचारियों की मांग पर कंडक्टर संदीप व कंडक्टर फाग सिंह को बहाल करके वर्कशॉप मैनेजर की करनाल से ट्रांसफर करने की सिफारिश भेजी गई। इस पर साढ़े सात बजे किया गया चक्का जाम दोपहर बारह बजे खोला गया।
विरोध जता रहे कर्मचारी अनिल, विरेंद्र, अंकुर, अनिल, पवन, बलवान, संजीव, तरसेम, श्यामलाल, विक्रम, बलवान सिंह सहित अन्य ने बताया कि कंडक्टर संदीप व फाग सिंह को बेवजह ही सस्पेंड किया है, जो गलत है। सरकार की हिदायतों के मुताबिक 65 वर्ष के बुजुर्ग की आधी टिकट है और कंडक्टर संदीप ने 62 वर्ष के बुजुर्ग की आधी टिकट नहीं बनाई, इसलिए वर्कशॉप मैनेजर ने सस्पेंड कर दिया।
दूसरा मामला कंडक्टर फाग सिंह के साथ है। इन्होंने एक सवारी को टिकट देकर बकाया टिकट के पीछे लिख दिया था। मौके पर सवारी को पैसे लेने याद नहीं रहे और बाद में आकर सवारी ने शिकायत दे दी। कर्मचारियों ने कहा कि जब खुले पैसे नहीं थे और कंडक्टर मना नहीं कर रहा है तो सस्पेंड क्यों किया गया? इन मामलों को दोपहर तक रोडवेज कर्मचारियों ने जमकर बवाल काटा।
दोनों गेट पर अड़ा दीं बसें
रोडवेज कर्मचारियों ने सभी बसें स्टैंड पर ही खड़ी कर पूरी तरह चक्का जाम कर दिया और बस स्टैंड के बीच स्टैंड के दोनों गेट के सामने भी बसें लगाकर आवाजाही बंद कर दी। सभी रोडवेज कर्मचारी वर्कशॉप के गेट पर धरने पर बैठ गए। सस्पेंड हुए दोनों कर्मचारियों की बहाली और सस्पेंड करने वाले वर्कशॉप मैनेजर सुरेश मलिक का यहां से ट्रांसफर करने की मांग उठाई। हड़ताल पर गए रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि तब तक बसें नहीं चलाएंगे जब तक उनको लिखित में आश्वासन नहीं मिलता।
लाखों रुपये का नुकसान, यात्री परेशान
करनाल डिपो की बसें सुबह से दोपहर तक न चलने के कारण करीब छह लाख रुपये का नुकसान हो गया है। अचानक हुई हड़ताल से सवारियों को सफर में दिक्कत हुई। प्राइवेट बसें ओवरलोड दौड़ीं। उधर, बस स्टैंड के चारों तरफ भी जाम लगा रहा। पुलिस को जाम खुलवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। उधर, बसें बंद रहने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोग प्राइवेट वाहनों से अपने गंतव्य तक पहुंचे, दोपहर 12 बजे के बाद ही यातायात सुचारू हो सका।
जीएम और टीएम को सुनाई खरी-खरी
दो कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई से गुस्साएं कर्मचारियों ने रोडवेज के जीएम रविंद्र पाठक व टीएम संजय रावल को खरी-खरी सुनाई। एक से डेढ़ घंटे तक रोडवेज अधिकारी व कर्मचारी आमने-सामने रहे और एक दूसरे पर आरोप जड़ते गए। कर्मचारियों ने पहले के मामलों को भी उठाया और अधिकारियों द्वारा की जा रही मनमानी के खिलाफ इसी तरह आवाज बुलंद करके रोष जताने का आह्वान किया। सबसे ज्यादा रोष वर्कशाप मैनेजर के व्यवहार को लेकर जताया गया।
वर्जन
दो कर्मचारियों के सस्पेंड करने के मामले में रोडवेज के कर्मचारियों ने चक्का जाम किया। इसमें दोनों कर्मचारियों को बहाल कर दिया है और वर्कशॉप मैनेजर सुरेश मलिक के ट्रांसफर की सिफारिश सरकार को कर दी है। मामले को सुलझा लिया गया है।
- राजीव मेहता, एसडीएम करनाल।