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फर्जी प्रॉपर्टी आईडी बनाने के मामले में नगर निगम कर्मी ही निकला मास्टर माइंड

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नगर निगम सदन की बैठक में पोर्टल हैक कर फर्जी अस्थायी प्रापर्टी आईडी बनाने के मामले में ढिलाई का मुद्दा गूंजने के बाद पुलिस भी हरकत में आई है। पुलिस ने नगर निगम के एक कंप्यूटर आपरेटर और एक अटल सेवा केंद्र संचालक को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों इस घोटाले के मास्टर माइंड बताए जा रहे हैं। इधर नगर निगम ने भी संविदा कंप्यूटर आपरेटर को बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही इस घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। पिछले दिनों जब नगर निगम व डीटीपी ने अवैध कालोनियों पर कार्रवाई शुरू की तो कई भवन स्वामियों ने रजिस्ट्री दिखाई। जिससे नगर निगम कमिश्नर विक्रम को शक हुआ कि इतनी बड़ी संख्या में आखिर फर्जी अस्थायी आईडी कैसे जारी हो गईं। इसकी जांच शुरू कराई तो 13 फरवरी को जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सरकार के पोर्टल को हैक कर फर्जी अस्थायी प्रापर्टी आईडी जारी की जा रही हैं। 209 फर्जी आईडी सामने आईं, जिन्हें तहसीलदार को सौंपा गया। जिसमें तहसीलदार ने बताया कि 209 फर्जी आईडी में से 143 से रजिस्ट्री हुई हैं।
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सिविल लाइन थाने में दी थी शिकायत
14 फरवरी को नगर निगम की कार्यकारी अधिकारी निशा शर्मा ने सिविल लाइन थाना में शिकायत दी थी कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा अवैध कालोनी में वैकल्पिक यूनिक आईडी तैयार कर रजिस्ट्री करवाने के लिए एनडीसी जारी किया है। इस दौरान करीब 209 आईडी जारी हुई हैं। कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया था। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के निरीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि 5 मार्च को मामले में दो आरोपियों अमित कुमार निवासी प्रेम नगर करनाल व गांधी नगर निवासी राजीव को गिरफ्तार कर लिया था। दोनों आरोपियों को 6 फरवरी को कोर्ट में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया गया। सोमवार को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। इनमें आरोपी अमित अटल सेवा केंद्र संचालक हैं तो वहीं राजीव नगर निगम में कंप्यूटर ऑपरेटर है।
जानिए कैसे बनाता था फर्जी एनओसी
पुलिस की जांच में सामने आया है कि डीयूएलबी पोर्टल पर लॉग-इन करने के लिए सिटीजन द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आता है। उस ओटीपी के माध्यम से पोर्टल में लॉग इन किया जा सकता है। आरोपी अमित ने आरोपी राजीव की मदद से मोबाइल नंबर 99999 99990 को बदल दिया था। इसलिए पोर्टल हैक करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। डीयूएलबी पोर्टल पर किसी अनाधिकृत कालोनी का एरिया सिलेक्ट करने पर साफ्टवेयर आगे प्रोसेसिंग नहीं करता है। सॉफ्टवेयर केवल वैध कॉलोनी का एरिया डालने पर ही प्रोसेस करता है। आरोपी अमित को इस बात की जानकारी थी। उसके पास अपने तीन अटल सेवा केंद्र हैं। अटल सेवा केंद्र संचालक होने के कारण डीड राइटर उसे जानते थे और अमित अटल सेवा केंद्र के कामों के कारण उनके पास आता-जाता रहता था। अमित डीड राइटरों को नगर निगम में अपनी अच्छी पहचान होने व काम जल्दी करवाने का दावा भी करता था। अस्थायी प्रापर्टी आईडी की आवश्यकता रजिस्ट्री करवाते समय टोकन नंबर लेने के लिए भी चाहिए। जब कोई डीड राइटर, खरीदार या कोई जमीन बेचने वाला रजिस्ट्री करवाने आता था और अस्थायी आईडी न होने के कारण डीड राइटर या खरीदार या बेचने वाला संबंधित डिटेल अमित को दे देते थे। अमित अपनी मर्जी से किसी भी वैध एरिया की अस्थायी आईडी बनाकर अवैध एरिया के लिए डीड राइटर, खरीदार या बेचने वाले को भेज देता था। अमित ने पोर्टल पर आवेदित कॉलोनी का आवेदन अनुमोदित कराने के लिए नगर निगम करनाल में संविदा पर लगे कर्मचारी राजीव से संपर्क बनाया था और उससे कहा था कि जब भी उसका कोई आवेदन आए तो उसे तुरंत अनुमोदित कर देना। जिसके लिए अमित राजीव को पैसे देता था। इसके बदले वह मोटी रकम लेता था।
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तहसील से भी होता था खेल, होगी जांच
नगर निगम ने 209 फर्जी अस्थायी आईडी जारी होने का विवरण पुलिस व तहसील को दिया था। तहसील से जानकारी हुई कि इनमें से 143 फर्जी आईडी पर रजिस्ट्री हो गई हैं। खास बात यह है कि इनमें से 106 रजिस्ट्री अवैध कालोनियों में की गई हैं। इससे भी बड़ा खेल तहसील कार्यालय से यह किया गया कि 23 रजिस्ट्री ऐसी कर दी गई जिनकी प्रापर्टी आईडी को वैध कालोनी की है, लेकिन उनकी रजिस्ट्री अवैध कालोनी में कर दी है। इस बड़े खेल से तहसील कार्यालय भी संदिग्धता के घेरे में आ गया है। आशंका है कि कहीं इस कार्यालय का भी कोई न कोई कर्मचारी इस खेल में शामिल तो नहीं है।
अस्थायी संपत्ति आईडी बनाने व रजिस्ट्री कराने के मामले की जांच अभी चल रही है। दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। इसमें यह भी संज्ञान में आया है कि 23 रजिस्ट्री ऐसी हैं, जिनकी आईडी तो वैध कालोनी की थी, इसके बावजूद उन पर रजिस्ट्री अवैध कालोनी में कर दी है। यह कैसा हुआ, इसकी जांच भी बारीकी से की जा रही है।
-गंगाराम पुनिया, पुलिस अधीक्षक करनाल
यह खुलासा नगर निगम ने ही करते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी, पुलिस जांच कर रही है। नगर निगम में ठेका व्यवस्था पर रखा कंप्यूटर क्लर्क राजीव वालियान यह मामला आने के बाद लगातार अनुपस्थित चल रहा था। इसकी भूमिका संदिग्ध पाकर उसकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।
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विक्रम, कमिश्नर नगर निगम करनाल
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