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Karnal News: फुटबॉल के जरिये बुलंदियां छूने का प्रयास

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करनाल। कर्ण स्टेडियम फुटबाॅल नर्सरी के खिलाड़ी अपनी मेहनत के दम पर अभिभावकों का नाम चमका रहे हैं। इस नर्सरी के आठ खिलाड़ी ऐसे हैं जो विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक लाकर परचम लहरा चुके हैं। वहीं छह खिलाड़ियों का भारतीय सेना में भी चयन हो चुका है।
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नर्सरी के अधिकतर खिलाड़ी निर्धन या मध्यम वर्ग से संबंध रखते हैं जोकि खुद की मेहनत से बेहतर खिलाड़ी बने हैं। खेल के प्रति उनका जज्बा देखते ही बनता है, मानसी ने अपनी प्रतिभा के दम पर मुकाम पाया है। ये खिलाड़ी खेल के साथ-साथ प्राइवेट नौकरी करते हुए अपनी आजीविका के साथ-साथ पढ़ाई का खर्चा भी निकाल लेते हैं। नर्सरी में वरिष्ठ प्रशिक्षक भूपिंद्र 2014 से जिले के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं जिससे वह आए दिन नए-नए आयामों को छू रहे है। इसके अलावा अन्य दो प्रशिक्षकों में पुनीत व अमित खिलाड़ियों की प्रतिभा तराशने व उन्हें बेहतर किक मारने का गुर सिखाने में जीतोड़ मेहनत करते हैं।



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खिलाड़ी बोले
जिले का नाम किया रोशन



फोटो - 203

ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी व इंडियन वूमन लीग में फुटबाॅल के वरिष्ठ वर्ग के मुकाबले खेले हैं। वरिष्ठ वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भाग लेकर जिले का नाम रोशन किया है। शुरूआत में 17 आयु वर्ग के स्कूल मुकाबले तथा 19 आयुवर्ग के स्कूली नेशनल भी खेले हैं। अभी फिलहाल बीपीएड की शिक्षा एलपीयू से प्राप्त कर रही हूं। मैंने फुटबाॅल खेल अपनी मर्जी से चुना है, प्राइवेट नौकरी के साथ-साथ खेल व पढ़ाई भी कर रही हूं।
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- मानसी
शाहपुर गांव से आकर करता हूं अभ्यास



फोटो -204

दो बार 19 आयु वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेली हैं। इसके अलावा खेलो इंडिया खेलो प्रतियोगिता में भाग लिया है। फुटबाॅल की 19 आयु वर्ग प्रतियोगिताओं में रजत पदक जीता है। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी मुकाबलों में भी अपनी प्रतिभा के दम पर बेहतर करते हुए राज्य टीम का भी प्रतिनिधित्व किया है। मैं करनाल के शाहपुर गांव से रोजाना कर्ण स्टेडियम में अभ्यास के लिए आता हूं। कोच पुनीत से प्रशिक्षण पाकर अपने कौशल को निखार रहा हूं।

- रोहित शाहपुर
परिवार का मिला सहयोग



फोटो - 205

खेलो इंडिया खेलो में 17 आयुवर्ग मुकाबलों में तीसरा स्थान हासिल करते हुए कांस्य पदक जीता है। यह प्रतियोगिताएं पंचकूला में आयोजित हुई थी। राज्यस्तरीय वरिष्ठ प्रतियोगिता में भी रजत पदक जीता है। इंटर यूनिवर्सिटी के साथ-साथ इंडियन वूमैन लीग में भी मुकाबले खेले हैं। करनाल के रमेश नगर की निवासी हूं, परिवार के सहयोग से फुटबाॅल की बेहतर खिलाड़ी बनी। भारतीय टीम में चयनित होकर देश के लिए पदक लाने का लक्ष्य है।

- सन्नो
खेलो इंडिया खेलो में जीता पदक


फोटो - 206
फुटबाॅल के 17 आयुवर्ग के कनिष्ठ आयुवर्ग के मुकाबले खेलती हूं। हाल में 12वीं की परीक्षा दी है, पाल नगर की रहने वाली हूं। फुटबाॅल मुकाबलों में मैंने खेलो इंडिया खेलो में कांस्य पदक जीता है। रोजाना कर्ण स्टेडियम में आकर कोच अमित व पुनीत के कुशल प्रशिक्षण में फुटबाॅल के बेहतर गुर सीख रही हूं ताकि अपने आप को इस काबिल बना सकूं कि मेरे नाम से मेरे परिवार को जाना जाए।

- आंचल
प्रतियोगिताओं के लिए कर रही तैयारी



फोटो -207

फुटबाॅल के राज्य व राष्ट्रीय स्तर के कई मुकाबले खेले हैं। भारतीय फुटबाॅल गेम प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है इसके अलावा खेलो इंडिया खेलो व भारतीय महिला लीग में भी भागीदारी रही है। करनाल स्थित वाल्मीकि बस्ती से छोटे से परिवार से निकलकर खेल में मुकाम बनाकर अपनी पहचान बनाई है। बेहतर खेल के दम पर खेल नीति के आधार पर 2022 में कर्ण स्टेडियम में बतौर कोच नियुक्ति हुई है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर रही हूं।

- उषा खिलाड़ी
देश सेवा का सपना हुआ पूरा


फोटो - 408

मैं कर्ण स्टेडियम फुटबाॅल नर्सरी का खिलाड़ी हूं। फुटबाॅल के कनिष्ठ आयुवर्ग 14 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेली है। हरियाणा प्रदेश की ओर से राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में वरिष्ठ राज्य प्रतियोगिता भी खेली हैं। अब वह भारतीय सेना में अग्निवीर के तहत कुमाऊं रेजीमेंट में हैं। देश सेवा की भावना बचपन से ही थी अब सेना में भर्ती होकर यह सपना भी पूरा हो गया।

- अजब सिंह





प्रशिक्षक बोले-
खिलाड़ियों का भविष्य संवारना प्राथमिकता

फोटो - 409

वह वर्ष 2018 में कर्ण स्टेडियम में बतौर फुटबाॅल कोच नियुक्त हुआ था। मैंने साई से स्पोटर्स कोचिंग में डिप्लोमा किया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का बेहतर खिलाड़ी रहा हूं। वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है। कुरुक्षेत्र के मथाना गांव से संबंध रखता हूं, पिता करनाल में पुलिस विभाग में अच्छे पद पर कार्यरत रहे हैं तभी करनाल में आकर इस मुकाम को पाया है। अब खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देना मुख्य प्राथमिकता है।
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- पुनीत प्रशिक्षक
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